नई दिल्ली-बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार (7 अक्टूबर) को कहा कि महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) की परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों को आंदोलन करने का अधिकार है, अगर उन्हें लगता है कि भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ियां हुई हैं. सरकार को इन छात्रों का भरोसा बहाल करना चाहिए.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने कहा कि प्रदर्शनकारियों की शिकायतें गंभीर हैं, हालांकि उसने छात्रों से कक्षाओं में लौटने को भी कहा. अदालत ने सरकार को तीन सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल कर करीब 70,000 रिक्त पदों का विभागवार और आरक्षण श्रेणीवार ब्योरा देने का निर्देश दिया.
मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी और जस्टिस अद्वैत सेठना की पीठ ने कहा, ‘वे छात्र हैं, राष्ट्र-विरोधी नहीं.’पीठ पुणे निवासी अमित सुपेकर की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें अधिकारियों को प्रदर्शनकारियों के लिए निर्धारित स्थान उपलब्ध कराने का निर्देश देने की मांग की गई थी. सुपेकर ने एक ही समय में चल रहे कथित ‘अवैध’ सार्वजनिक प्रदर्शनों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की थी.
पुलिस की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद पुणे में तीन जगहों पर हजारों नौकरी के उम्मीदवार प्रदर्शन कर रहे हैं. ये प्रदर्शन इस तरह के आंदोलनों की हालिया श्रृंखला का हिस्सा हैं. जुलाई में परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों के प्रदर्शन के बाद तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था. वहीं, भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ करीब एक महीने से आंदोलन कर रहे नौकरी के उम्मीदवारों और छात्र संगठनों ने झारखंड सरकार द्वारा उनकी लगभग सभी प्रमुख मांगें मान लिए जाने के बाद धरना स्थगित करने की घोषणा की थी.
पीठ ने कहा कि पुणे एक प्रमुख शैक्षणिक केंद्र है और वहां अधिकांश छात्र वास्तव में पढ़ाई में रुचि रखते हैं.
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