Nandigram Assembly Bypolls: पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले ही घमासान मचा हुआ है. पहले ममता बनर्जी गुट की उम्मीदवार ने अपना नाम वापस ले लिया. इसके बाद बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने का ऐलान किया. शाम होते-होते कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान (Milan Pradhan) को एक पुराने कथित हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया है. नंदीग्राम में 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है. नतीजे 9 अक्तूबर को आएंगे.
मिलन प्रधान की गिरफ्तारी 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़े एक पुराने हत्या मामले में बताई जा रही है. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने उन्हें पुराने मामले में गिरफ्तार किया है. मिलन प्रधान की गिरफ्तारी ऐसे समय हुई, जब वह नंदीग्राम इलाके में चुनाव प्रचार कर रहे थे. नंदीग्राम का 2007 का आंदोलन ममता बनर्जी के राजनीतिक सफर में महत्वपूर्ण माना जाता है. भूमि अधिग्रहण के खिलाफ हुए इस आंदोलन ने तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस के अभियान को मजबूती दी थी. पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चे ने करीब 34 वर्षों तक शासन किया था. इसके बाद 2011 में तृणमूल कांग्रेस सत्ता में आई थी.
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ममता ने आज ही समर्थन का किया था ऐलान
मिलन प्रधान (Who Is Milan Pradhan?) की गिरफ्तारी से पहले शुक्रवार (सितंबर, 18, 2026) को ममता बनर्जी ने अपने कालीघाट स्थित आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने की घोषणा की थी. यह फैसला उनके गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे के नामांकन वापस लेने के बाद आया. न्यूज एजेंसी ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, संचिता प्रधान डे ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद अपनी उम्मीदवारी वापस ली थी.
ममता बनर्जी ने कहा कि नंदीग्राम में कांग्रेस को समर्थन देने का फैसला INDIA ब्लॉक को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम है. उन्होंने कहा कि बंगाल से इस गठबंधन को मजबूत करने का संदेश जाना चाहिए. हालांकि, कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि कांग्रेस ने ममता बनर्जी से समर्थन नहीं मांगा था. उन्होंने कहा कि ममता एक राजनीतिक नेता हैं और उन्हें अपनी बात रखने का अधिकार है. उनके अनुसार, ममता के गुट के उम्मीदवार के नामांकन वापस लेने के बाद उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने की घोषणा की है.
नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह पर भी विवाद चल रहा है. चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को दोनों गुटों के लिए ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पारंपरिक ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी. इसके बाद आयोग ने ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिन्ह दिया. वहीं, अरूप राय के नेतृत्व वाले गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया. नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार की गिरफ्तारी ममता बनर्जी के समर्थन और तृणमूल कांग्रेस के नाम-चिन्ह विवाद ने 6 अक्टूबर के उपचुनाव से पहले राज्य की राजनीति को और चर्चा में ला दिया है.
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