नई दिल्ली-सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि केवल परिवहन संबंधी कागज़ात न होने से यह नहीं माना जा सकता कि मवेशियों को वध के लिए ले जाया जा रहा था. अदालत ने छत्तीसगढ़ कृषि पशु संरक्षण अधिनियम के तहत दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति को बरी कर दिया.जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की दो सदस्यीय पीठ ने अपीलकर्ता की दोषसिद्धि को रद्द कर दिया. वह उन छह आरोपियों में शामिल था, जिन्हें कथित तौर पर वध के लिए 32 बैलों को ले जाने के मामले में दोषी ठहराया गया था.
पीठ ने कहा कि पुलिस यह साबित करने में विफल रही कि आरोपी की मंशा मवेशियों को वध के लिए ले जाने की थी.
अभियोजन पक्ष ने कहा था कि जिस ट्रक को रोका गया, उसमें चालक और क्लीनर के पास छत्तीसगढ़ से ओडिशा तक मवेशियों को ले जाने की अनुमति देने वाला कोई दस्तावेज नहीं था.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘केवल इस तथ्य पर कि परिवहन के साथ कोई दस्तावेज नहीं था, इस आधार पर यह अनुमान नहीं लगाया जा सकता कि मवेशियों को वध के लिए ले जाया जा रहा था.’
अदालत ने कहा, ‘हम दोषसिद्धि को बरकरार रखने का कोई कारण नहीं पाते, खासकर तब, जब एक पशु चिकित्सक और ‘गौशाला समिति’ के प्रमुख ने अदालत के समक्ष कहा कि जब्त किए गए मवेशी कृषि कार्यों में इस्तेमाल के लिए स्वस्थ और उपयुक्त थे.’
अभियोजन पक्ष का आरोप था कि सूचना मिलने पर एक हेड कांस्टेबल ने, जो इस मामले में गवाह भी था, केड़ुवा से ओडिशा की ओर जा रहे एक ट्रक को रोका. ट्रक में 32 बैल ले जाए जा रहे थे.
मवेशियों को जब्त कर लिया गया और ट्रक के चालक तथा क्लीनर को गिरफ्तार कर लिया गया. ट्रक के आगे चल रही एक बोलेरो कार को भी एस्कॉर्ट वाहन के रूप में रोका गया और उसमें सवार चार लोगों को गिरफ्तार किया गया. इनमें अपीलकर्ता भी शामिल था.
सभी आरोपियों को कानून की धारा 6 के तहत दोषी ठहराया गया और धारा 10 के तहत प्रत्येक को एक साल के कठोर कारावास तथा 1,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई. निचली अदालत ने आरोपियों को दोषी ठहराया था, अपीलीय अदालतों ने भी दोषसिद्धि को बरकरार रखा था. इसके बाद हाईकोर्ट ने सजा घटाकर पहले ही जेल में बिताई गई अवधि के बराबर कर दी थी.सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपीलकर्ता ने दलील दी कि मवेशियों को वध के लिए ले जाने की मंशा साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं है और उसने खुद को निर्दोष बताया. दलीलें सुनने के बाद पीठ ने उसकी अपील मंजूर कर ली.
अदालत ने कहा कि धारा 6 के तहत अपराध साबित करने के लिए यह प्रमाणित करना आवश्यक है कि मवेशियों को वध के लिए ले जाया जा रहा था या आरोपी को यह जानकारी थी कि उनका वध किए जाने की संभावना है.
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