नई दिल्ली, 9 मई (आईएएनएस)। अगस्तावेस्टलैंड मामले को लेकर हुए हंगामे के कारण सोमवार को राज्यसभा की कार्यवाही अनेक बार बाधित हुई। कांग्रेस ने प्रधनमंत्री पर झूठ बोलने और इस मामले को चुनावी मुद्दा बनाने का आरोप लगाया।
थोड़ी देर बाद जब उच्च सदन की कार्यवाही फिर शुरू हुई, तो सदन में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने केरल में मोदी की चुनावी रैली से संबंधित समाचार पत्र की रपट का उल्लेख किया और कहा कि सरकार कांग्रेस की छवि खराब करने के लिए अगस्ता सौदे का इस्तेमाल कर रही है।
आजाद ने कहा, “हमने संसद के दोनों सदनों में अगस्तावेस्टलैंड मुद्दे पर बहस की। दोनों में से किसी सदन में किसी सदस्य ने यह नहीं कहा कि संप्रग के नेताओं ने पैसे लिए। न तो इतालवी अदालत ने ही कहा है कि संप्रग के नेताओं ने पैसे लिए थे।”
आजाद ने कहा, “हमने शुरू से ही कहा है कि उद्देश्य (हो हल्ला के पीछे) सदन के अंदर बहस करना नहीं है, यह तो सदन के बाहर इस्तेमाल करने के लिए है और चुनाव के दौरान कांग्रेस नेतृत्व की छवि खराब करने के लिए है। इसी तरह 80 के दशक में बोफोर्स के साथ हुआ था।”
अजाद ने कहा कि यह मुद्दा इसलिए उठाया जा रहा है, क्योंकि इसे चुनाव में कांग्रेस के खिलाफ इस्तेमाल किया जा रहा है।
उन्होंने समाचार पत्र की रपट को पढ़ा, जिसमें मोदी ने एक चुनावी रैली में कहा था कि हेलीकॉप्टर खरीदने के लिए संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के नेता ने पैसे लिए थे।
आजाद ने कहा, “संसद के किसी सदन में प्रधानमंत्री क्यों नहीं बोलते हैं? जब यह तय किया गया था कि कार्रवाई होनी चाहिए तो वे इसे चुनावी मुद्दा क्यों बना रहे हैं?”
आजाद ने कहा, “केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) प्रधानमंत्री के अधीन है। अगर वह इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं तो वह भी प्रभावित होगी।”
सरकार का पक्ष दोहराते हुए केंद्रीय संसदीय कार्य राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि अगस्तावेस्टलैंड मामले में दोषी दंडित होंगे।
नकवी ने कहा, “जिन्होंने रिश्वत दी है, वे जेल में हैं, जिन्होंने रिश्वत ली है, वे बहुत शीघ्र जेल में होंगे।”
कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने प्रधानमंत्री से सदन में स्पष्टीकरण देने की मांग की।
शर्मा ने कहा, “प्रधानमंत्री ने जो बयान दिए, उसकी पुष्टि उन्हें जरूर करनी चाहिए। उन्होंने कहा है कि अदालत ने कांग्रेस के नेताओं को दोषी ठहराया है।”
कांग्रेस के सदस्य टोली बनाकर सभापति के आसन के निकट इकट्ठे हो गए और प्रधानमंत्री को झूठा बताते हुए नारे लगाने लगे।
हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही थोड़ी देर के लिए बाधित हुई।
जब सदन की कार्यवाही पुन: शुरू हुई तो उपसभापति पी.जे.कुरियन ने कहा कि जो कुछ बाहर कहा गया है, उस पर आसन संज्ञान नहीं ले सकता है।
इस पर आनंद शर्मा ने कहा, “प्रधानमंत्री ने अपने रक्षामंत्री का खंडन किया है। वह पहले ही निर्णय कर रहे हैं।”
इस बीच तृणमूल कांग्रेस के सदस्य सुखेंदु राय ने कार्यवाही बाधित कर रहे कांग्रेस के सदस्यों को सदन से निष्कासित करने की मांग की। गत सप्ताह नियम 255 के तहत सभापति एम. हामिद अंसारी ने उन्हें एक दिन के लिए सदन से निष्कासित कर दिया था। उन्होंने उसी नियम को लागू करने की मांग की।
कांग्रेस के सदस्य पुन: सभापति के आसन के निकट एकत्रित हो गए, जिससे सदन को दोपहर 12 बजे तक स्थगित करने को बाध्य होना पड़ा।
प्रश्नकाल अलग नहीं था और सभापति अंसारी की ओर से शांति बनाए रखने को कहने बावजूद कांग्रेस के सदस्य प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ नारे लगाते रहे।
हालांकि कांग्रेस के सदस्य प्रश्नकाल में आसंदी के निकट नहीं गए।
सदन की कार्यवाही पहले आधा घंटे और फिर अपराह्न् दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
भोजनावकाश के बाद भी सदन में हंगामा जारी रहा। कांग्रेस ने सवाल पूछा कि उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन की घोषणा को संसद के अनुसमर्थन के बिना कैसे सरकार ने उत्तराखंड बजट को सूची में शामिल कर दिया?
कुरियन ने सदस्यों से कहा कि जब सदन इस विषय पर कार्यवाही शुरू करेगा और विनियोग एवं वित्त विधेयक के साथ उन्हें आगे बढ़ने को कहेगा तब इस मुद्दे को उठाया जाना चाहिए।
सदन में हंगामा जारी रहने के कारण कार्यवाही अपराह्न् तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
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