अगस्ता वेस्टलैंड में भ्रष्टाचार मुख्य मुद्दा : रक्षा मंत्रालय

नई दिल्ली, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर सौदे में पहला मुद्दा भ्रष्टाचार का है और मंत्रालय सच्चाई को सामने लाने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगा।

नई दिल्ली, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर सौदे में पहला मुद्दा भ्रष्टाचार का है और मंत्रालय सच्चाई को सामने लाने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगा।

इस मुद्दे पर रक्षा मंत्रालय की पहली आधिकारिक टिप्पणी में यह भी कहा गया है कि जांच एजेंसियां इसके रह पहलुओं की जांच कर रही हैं। इनमें विदेशी नागरिकों कार्लो गेरोसा, गुईडो हास्के राल्फ और क्रिश्चियन माइकल जेम्स की गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण भी शामिल है। ये तीनों इस सौदे के कथित बिचौलिया हैं।

कांग्रेस ने एक ही दिन पहले सरकार पर काली सूची में डाली गई कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड की मदद की कोशिश करने का आरोप लगाया था और सवाल किया था कि सरकार ने उस कंपनी के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की?

उसके दूसरे ही आए इस बयान में मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि कुछ घिसी-पिटी शब्दावली पर सवाल उठाए गए हैं, जिससे लगता है कि उनका मकसद भ्रष्टाचार के मुख्य मुद्दे से ध्यान भटकाना है।

यह भी कहा गया है कि मौजूदा सरकार ने सच्चाई का पता लगाने के लिए प्रभावी कार्रवाई की है। भ्रष्ट व इस मामले में गलत करने वालों को न्याय के दायरे में लाने के लिए कोई कदम उठा नहीं रखेगी। इसमें समय अधिक लग रहा है, क्योंकि इस गलत काम में शामिल कुछ प्रमुख व्यक्ति देश से बाहर हैं।

इटली की एक अदालत ने पाया है कि अगस्ता वेस्टलैंड ने अति विशिष्ट लोगों के इस्तेमाल के लिए 12 हेलीकॉप्टरों की आपूर्ति से जुड़े 53 करोड़ डॉलर का सौदा पक्का करने के लिए भारतीय अधिकारियों को रिश्वत दी थी।

अगस्ता वेस्टलैंड की पैतृक कंपनी फिनमेकैनिका के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) गिउसेप्पी ओर्सी को इतालवी प्रशासन द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद जब विवाद सामने आया तो वर्ष 2013 में ही भारत सरकार ने यह सौदा रद्द कर दिया था।

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