नई दिल्ली, 13 मई (आईएएनएस)। बजट सत्र के दूसरे हिस्से के दौरान संसद के दोनों सदन अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकाप्टर रिश्वतखोरी मुद्दे पर जोरदार हंगामा, उत्तराखंड के राजनीतिक घटनाक्रमों पर अप्रिय दृश्य, नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्रित्व काल में गुजरात राज्य पेट्रोलियम कॉरपोरेशन पर सीएजी की नकारात्मक रपट पर तीखी झड़पों के गवाह बने। संसद सत्र शुक्रवार को समाप्त हो गया।
तय समय से दो दिन पहले ही बुधवार को लोकसभा की कार्यवाही समाप्त हो गई।
विभिन्न मुद्दों पर कटुता होते हुए भी संसद में कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित हुए।
16वीं लोकसभा के आठवें सत्र में दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता समेत कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित हुए। इस संहिता को काले धन का पता लगाने के मामले में एक महत्वपूर्ण सुधारात्मक कदम कहा जा रहा है। इस महत्वपूर्ण विधेयक को बाद में राज्यसभा से भी मंजूरी मिल गई।
राज्यसभा में भी विभिन्न मुद्दों पर मतभेदों के बावजूद बिहार में राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय में उन्नत करने वाला विधेयक 11 मई को पारित हो गया। यह विधेयक उसी दिन लोकसभा में भी पारित हो गया था, इसे एक तरह का रिकार्ड माना गया।
उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू करने को लेकर चल रही घमासान कानूनी लड़ाई के बीच कांग्रेस के सदस्यों ने पहाड़ी राज्य के बजट की स्वीकृति पर कड़ा प्रतिरोध जताया, जबकि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसे संवैधानिक जरूरत बताया।
उत्तराखंड में में 27 मार्च से राष्ट्रपति शासन लागू था। केंद्र ने नए वित्त वर्ष में राज्य के खर्च की वैधनिकता सुनिश्चित करने के लिए 31 मार्च को एक अध्यादेश जारी किया था।
इस सत्र में राज्यसभा में वित्त विधेयक 2016, विनियोग (नम्बर-2) विधेयक 2016, दिवाला एवं शोधन अक्षमता विधेयत और भारतीय न्यास संशोधन विधेयक पारित हुए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि यह बहुत अच्छा रहा होता अगर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विधेयक और प्रतिपूरक वनीकरण कोष प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (सीएएमपीए) विधेयक पारित हो गए होते।
प्रधानमंत्री ने कहा, “सीएएमपीए पर हम लोगों ने सत्र के दौरान फैसला कर लिया होता तो राज्यों को 42,000 करोड़ रुपये मिलते। इससे प्रत्येक राज्य को दो से तीन हजार करोड़ रुपये मिलते।”
उन्होंने कहा कि इसी तरह बहुप्रतीक्षित जीएसटी विधेयक के पारित होने से राज्यों को बहुत फायदा हुआ होता।
लोकसभा की पूरी कार्यवाही बिना किसी स्थगन के पूरी हुई। इस पर लोकसभा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस से कहा, “यह इतिहास रचने जैसा है।”
उन्होंने कहा कि इस तरह लोकसभा की कार्यवाही का सुचारू संचालन 25 साल पहले 1990 में रबि राय के अध्यक्ष काल में और 1992 में शिवराज पाटिल के अध्यक्ष काल में हुआ था।
गत बुधवार को समाप्त हुए लोकसभा के सत्र के दौरान 120 प्रतिशत काम हुए। लोकसभा की 13 बैठकें 92 घंटे और 21 मिनट तक चलीं।
राज्यसभा के सत्र के अंतिम दिन सदन से रिटायर हो रहे कई सदस्यों को विदाई पर अपनी समापन टिप्पणी में सदन के नेता और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संसद के दोनों सदनों की शक्तियों और प्रधिकारों पर पुन: बहस शुरू करने की इच्छा जाहिर की।
उन्होंने शासन के दो मूल कत्र्तव्यों-कानून और बजट बनाने के मामले में सामन्य तौर पर संसद और खास तौर पर लोकसभा की सर्वोच्चता को तरजीह देने की बात कही। उन्होंने कहा कि इन शक्तियों में कमी करने का परिणाम संसदीय लोकतंत्र के भविष्य से समझौता करने जैसा हो सकता है।
जेटली ने कहा कि संसद के दोनों सदनों के अधिकारों पर इटली और आस्ट्रेलिया समेत कई देशों में बहस हो रही है।
राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी ने जीवंत बहस में भाग लेने के लिए सदस्यों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि सदस्यों ने राजनीतिक बाध्यताओं और वैचारिक मतभेदों के बावजूद अपनी ओर से सहयोग किया है।
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