अदाकारा साधना नहीं रहीं (लीड-2)

मुंबई, 25 दिसंबर (आईएएनएस)। सन् 1960 के दशक की अग्रणी अभिनेत्री साधना का यहां शुक्रवार को निधन हो गया। उनके एक पारिवारिक मित्र के मुताबिक, वह काफी समय से कैंसर से जूझ रही थीं।

साधना (74) के परिवार में एक गोद ली हुई बेटी है। उनके पति आर.के. नय्यर का 1995 में निधन हो गया था।

उनकी पारिवारिक मित्र और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रदेश प्रवक्ता शाइना एन.सी. ने आईएएनएस को बताया, “साधना (शिवदासानी) ने शुक्रवार सुबह अपने घर में आखिरी सांस ली।”

सन् 1960 और 1970 के दशक की अग्रणी अभिनेत्री साधना का जन्म 2 सितंबर 1941 को कराची में हुआ था। इसके बाद उनका परिवार भारत में आकर मुंबई में बस गया। देश के विभाजन के समय वह केवल सात साल की थीं।

साधना ने 1955 में राज कपूर की फिल्म ‘श्री 420’ में बाल कलाकार के रूप में हिंदी फिल्मों में प्रवेश किया था।

इसके बाद 1958 में उन्होंने भारत की पहली सिंधी भाषा की फिल्म ‘अबाना’ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

जब वह फिल्म की प्रचारक तस्वीर में सामने आईं तो उन पर निर्माता सशधर मुखर्जी की नजर गई और इसके बाद वह एक्टिंग स्कूल से जुड़ीं।

साधना के सह-छात्र भविष्य में उनके सह-अभिनेता जॉय मुखर्जी बने। दोनों ने 1960 में सशाधर मुखर्जी की फिल्म ‘लव इन शिमला’ में काम किया। यह फिल्म आर.के. नय्यर द्वारा निर्देशित थी, साधना ने बाद में उन्हीं से शादी कर ली।

इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और उन्हें ‘परख’ जैसी फिल्म के लिए सम्मानित किया गया।

साधना को लोकप्रिय ‘फ्रिंज’ हेयरकट का श्रेय दिया जाता है, जिसे ‘साधना कट’ का नाम दिया गया और बॉलीवुड में उनकी चूड़ीदार और कुर्ता काफी मशहूर है।

साधना को उनकी अदाकारी और अलग हेयरस्टाइल के अलावा ‘एक मुसाफिर एक हसीना’,’असली-नकली’, ‘मेरे महबूब’, ‘वक्त’, ‘वो कौन थी’, ‘मेरा साया’, ‘गबन’, ‘एक फूल, दो माली’ जैसी सफल फिल्मों के लिए जाना जाता है।

साधना ने अपनी आखिरी उपस्थिति अपने रिश्तेदार और अभिनेता रणधीर कपूर के साथ मई 2014 के फैशन शो के रैंप पर दर्ज करवाई, जहां उन्होंने कैंसर और एड्स के मरीजों का सहयोग किया।

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