अगरतला, 8 फरवरी (आईएएनएस)। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार ने विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के नेता प्रवीण तोगड़िया की इस मांग को गलत बताया है कि 44 साल पुराने इंदिरा-मुजीब समझौते में बदलाव की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अधिकांश भारतीय समझौते को जारी रखने और भारत-बांग्लादेश रिश्तों को और मजबूत करने के पक्ष में हैं।
तोगड़िया ने हाल ही में यहां एक सभा में कहा था कि घुसपैठियों की पहचान के लिए आधार 1951 की मतदाता सूची होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विहिप इंदिरा-मुजीब समझौते में बांग्लादेशी घुसपैठियों के बारे में आकलन का आधार वर्ष 1971 बनाने के प्रावधान से असहमत है।
यह समझौता 19 मार्च, 1972 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और तत्कालीन बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख मुजीबुर रहमान के बीच हुआ था।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता एवं त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार (69) ने यहां एक पुस्तक विमोचन समारोह में कहा, “अधिकांश भारतीय और सरकार न तो इंदिरा-मुजीब समझौते को रद्द करने के पक्ष में हैं और न ही इसमें बदलाव के पक्ष में हैं।”
सरकार ने कहा, “तोगड़िया की यह मांग कि बांग्लादेश के कुछ इलाकों में हिंदुओं की रक्षा के लिए भारतीय सेना को तैनात किया जाना चाहिए और बांग्लादेशी घुसपैठिये के बारे में पता करने के लिए डीएनए टेस्ट होने चाहिए, बेहद खतरनाक हैं और ऐसी मांगें केवल किसी देश के खिलाफ युद्ध को भड़का सकती हैं।”
उन्होंने कहा, “तोगड़िया ने बांग्लादेशी घुसपैठियों के लिए मृत्युदंड की मांग की है। ऐसी मांग इस संवेदनशील मुद्दे में आग लगाने का काम कर सकती है। ऐसी मांगें केवल दो देशों के बीच के संबंध को खराब कर सकती हैं।”
बांग्लादेश में भी लोकप्रिय माणिक सरकार ने कहा कि भारत और बांग्लादेश के संबंध नई ऊंचाई पर हैं। इन्हें किसी भी कीमत पर बर्बाद नहीं होने देना चाहिए, बल्कि रिश्तों को और बेहतर बनाना चाहिए।
पुस्तक विमोचन समारोह में बांग्लादेश के कुछ लेखक और कवि भी मौजूद थे।
बांग्लादेशी बुद्धिजीवियों से सरकार ने कहा, “आपकी तरह, हमारे हालात भी ठीक नहीं हैं। विद्वेषपूर्ण तत्व और असहज राजनैतिक परिस्थितियां भारत और बांग्लादेश, दोनों जगहों पर हैं। हमें चौकन्ना रहना होगा।”
कांग्रेस ने त्रिपुरा सरकार से तोगड़िया को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
dharmpath.com dharmpath