उन्होंने पत्रकारों से कहा कि नक्सली बंदूक उठाकर मौजमस्ती नहीं कर रहे है, बल्कि अपने युवावस्था को त्याग कर जंगलों में घूम रहे हंै और कठिन जीवन जी रहे हैं। मेरी आपत्ति हिंसा और बंदूक से है, इसलिए उन्हें मानवता को अपनाकर संविधान के अनुरूप शांति के लिए सबके साथ आना होगा।
यहां आयोजित कार्यक्रम में श्रीश्री ने उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं को ध्यान कराकर योग कराया।
मिनी स्टेडियम में आयोजित महासत्संग में हजारों समर्थकों व आम जनता को संबोधित करते हुए श्रीश्री ने कहा कि वनवासी लोग दिल और दिमाग से शुद्ध रहते हैं, इससे देश की जनता को सीखने की जरूरत है।
उन्होंने कहा, “हमारे स्वार्थी सोच के कारण कम्युनिज्म का उदय हुआ है। पहला दोषी हम हैं। हमने उन्हें नाराज किया, इसलिए वे बागी हो गए। नक्सल नेताओं से आग्रह है कि वे दोषी नहीं हैं, इसलिए आगे आएं और शांति का मार्ग निकालें जिससे देश प्रगति करे और युवा आगे बढ़े।”
श्रीश्री ने कहा कि आदिवासी इलाकों के युवा काफी प्रतिभाशाली हैं, इसलिए यह दुनिया का सबसे बेहतरीन स्पोर्ट्स अकादमी तैयार की जा रही है, जिसके जरिए यहां के युवा आगे बढ़कर ओलम्पिक के मेडल लाने में कामयाब होंगे।
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