नई दिल्ली, 25 जनवरी (आईएएनएस)। ऊर्जा सुरक्षा के लिए भारत के प्रयासों को बुधवार को एक बड़ी सफलता मिली, जब अबुधाबी की सरकारी कंपनी के साथ भविष्य की अप्रत्याशित जरूरतों के लिए कच्चे तेल का सामरिक भंडार बनाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
नई दिल्ली, 25 जनवरी (आईएएनएस)। ऊर्जा सुरक्षा के लिए भारत के प्रयासों को बुधवार को एक बड़ी सफलता मिली, जब अबुधाबी की सरकारी कंपनी के साथ भविष्य की अप्रत्याशित जरूरतों के लिए कच्चे तेल का सामरिक भंडार बनाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
यह समझौता दो सरकारी कंपनियों – भारतीय सामरिक पेट्रोलियम भंडार लिमिटेड और अबुधाबी राष्ट्रीय तेल कंपनी के बीच किया गया।
भारत के दौरे पर आए अबुधाबी के क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हुई बैठक के बाद इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। मोदी ने कहा, “हमारी ऊर्जा साझेदारी हमारे संबंधों की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। यह हमारी ऊर्जा सुरक्षा में योगदान देता है।”
उन्होंने कहा, “महामहिम और मैंने विशिष्ट परियोजनाओं और प्रस्तावों के माध्यम से हमारे ऊर्जा संबंधों को एक रणनीतिक दिशा में बदलने के तरीकों पर चर्चा की। इस संबंध में लंबी अवधि की आपूर्ति के ठेके और ऊर्जा के क्षेत्र में संयुक्त उद्यमों की स्थापना फायदेमंद रास्ते हो सकते हैं।”
चूंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 80 प्रतिशत आयात करता है, इसलिए सरकार ने आपात स्थिति के दौरान बाहर से तेल आपूर्ति में अवरोध को ध्यान में रखते हुए एक तेल भंडार स्थापित करने का फैसला किया है। ये भंडार पहाड़ों के अंदर सुरंग बनाकर स्थापित किए जाएंगे, जो तेल कंपनियों के मौजूदा भंडारों के अतिरिक्त होंगे।
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