लखनऊ, 25 जनवरी (आईएएनएस/आईपीएन)। समाजवादी पार्टी (सपा) का कांग्रेस के साथ गठबंधन होने के बाद उप्र के बदले समीकरण में जनता दल (यूनाइटेड) ने उप्र में विधानसभा चुनाव के मैदान से अपने पैर खींच लिए हैं। मतलब जदयू अब उप्र के विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेगी। यह जानकारी जदयू उप्र के प्रदेश महासचिव सुभाष पाठक ने दी।
लखनऊ, 25 जनवरी (आईएएनएस/आईपीएन)। समाजवादी पार्टी (सपा) का कांग्रेस के साथ गठबंधन होने के बाद उप्र के बदले समीकरण में जनता दल (यूनाइटेड) ने उप्र में विधानसभा चुनाव के मैदान से अपने पैर खींच लिए हैं। मतलब जदयू अब उप्र के विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेगी। यह जानकारी जदयू उप्र के प्रदेश महासचिव सुभाष पाठक ने दी।
पाठक ने कहा, “अब हमारी पार्टी का पूरा फोकस वर्ष 2017 नहीं वर्ष 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव पर है। पार्टी ने प्रदेश में सांप्रदायिक ताकतों को कमजोर करने व धर्मनिरपेक्ष शक्तियों को मजबूती देने के उद्देश्य से इस बार विधानसभा चुनाव में अब अपना कोई प्रत्याशी नहीं उतारने का फैसला किया है।”
उन्होंने बताया कि पटना में हुई पार्टी की कोर कमेटी की बैठक में यह फैसला किया गया कि भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए पार्टी अपना कोई प्रत्याशी चुनाव मैदान में नहीं उतारेगी।
पाठक ने बताया, “कोर कमेटी की बैठक में शामिल पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार, प्रधान महासचिव केसी त्यागी, पार्टी के उप्र प्रभारी आरसीपी सिंह, उप्र अध्यक्ष सुरेश निरंजन भईया सहित अन्य शीर्ष पदाधिकारियों ने यह निर्णय लिया कि धर्म निरपेक्षता बरकरार रहे। इसके लिए हमने सोचा था कि बिहार मॉडल पर उप्र में भी गठबंधन बने जो नहीं बन पाया। हमारी सोच है कि गैर भाजपा-गैर बसपा की सरकार बने।”
उन्होंने कहा कि सपा-कांग्रेस गठबंधन के बाद हमारा चुनाव में न उतरने का निर्णय है। अब हमारी पार्टी का पूरा फोकस वर्ष 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव पर है।”
गौरतलब है कि इससे पूर्व आम आदमी पार्टी (आप) भी उप्र के विधानसभा चुनाव के मैदान से बाहर होने का ऐलान कर चुकी है। हालांकि उसने भाजपा के खिलाफ प्रचार करने की बात कही है।
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