अब नहीं होगी आयुर्वेद की चोरी, फार्माकोपिया की शुरुआत

गाजियाबाद, 13 दिसम्बर (आईएएनएस)। भारत के आयुर्वेद की दुनिया में अब कोई चोरी नहीं कर सकेगा। गाजियाबाद स्थित भारतीय चिकित्सा एवं होम्योपैथी भेषज संहिता आयोग ने आयुर्वेदिक दवाओं के फॉर्माकोपिया को ऑनलाइन जोड़ दिया है। केंद्रीय आयुष मंत्री श्रीपद येसो नाईक ने इसका शुभारंभ करते हुए बताया कि 700 तरह की आयुर्वेदिक दवाओं की जानकारी भारतीय प्रमाण के साथ सार्वजनिक की गई है।

उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के मानकों को विकसित करने और उनकी उपयोगिता के साथ क्रियान्वयन के लिए ये बहुत जरूरी कदम था। इससे न सिर्फ आयुर्वेद औषधियों की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इन्हें ख्याति भी हासिल हो सकेगी।

इस दौरान आयुष मंत्रालय के सलाहकार डॉ. मनोज नेसरी ने भी भारतीय चिकित्सा पद्घतियों के विकास कार्य पर जोर देते हुए कहा कि विभिन्न देशों के फॉर्माकोपियल समितियों के साथ भारतीय चिकित्सा एवं होम्योपैथी भेषज संहिता आयोग समझौता ज्ञापन कर रहा है। इसका असर यह होगा कि देश के आयुष वैज्ञानिक औषधियों के मानकों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में सफल हो सकेंगे।

आयोग के निदेशक ने बताया कि अब अलग अलग मोनोग्राफों को ऑनलाइन मंच पर लाया जाएगा जिससे ये मानक शीघ्रता से डाउनलोड व प्रभावी किए जा सकेंगे। वहीं एमिल फॉर्मास्यूटिकल के कार्यकारी निदेशक संचित शर्मा ने कहा है कि आयुर्वेद क्षेत्र में सरकार का यह प्रयास ऐतिहासिक है। इस वक्त जहां जापान भारत के साथ मिलकर योग को अपने यहां लाना चाहता है। वहीं अन्य देशों के लिए भारतीय आयुर्वेद को सात अंतर्राष्ट्रीय भाषाओं में लाना भविष्य में बड़ा फायदा दे सकता है। कार्यक्रम के दौरान आयुर्वेदिक भेषज समिति के अध्यक्ष प्रो वीके जोशी, निदेशक डॉ. जीएन सिंह मौजूद रहे।

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