उन्होंने कहा कि राजधानी लखनऊ में भी कानून व्यवस्था पर काबू पाने में असमर्थ पुलिस अब गरीबों, ठेलों और खोमचे वालों पर अपनी गाज गिरा रही है और यह फरमान जारी हुआ कि इन गरीब लोगों को रोजी-रोटी कमाने के लिए सड़क के किनारे दुकान लगाने पर गुंडा एक्ट में जेल भेज दिया जाएगा।
डॉ. अहमद ने कहा, “हमारा भारत कृषि प्रधान देश है, जिसमें कृषि कार्य में व्यस्त किसानों के साथ साथ गरीबों और मजदूरों की संख्या अधिक है। प्रदेश सरकार को चाहिए कि वेंडिग जोन में सर्वप्रथम इन गरीब दुकानदारों को स्थान आवंटित करे। उसके बाद ही कोई सख्त कदम उठाए, ताकि इनका परिवार भुखमरी का शिकार न हो।
लेकिन प्रदेश सरकार लगभग डेढ़ वर्ष से गरीबों के उद्धार की कोई योजना लागू नहीं कर सकी है। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में गरीबों, पिछड़ों मजदूरों और कामगारों के साथ- साथ किसानों की उन्नति करने का वादा किया था जो आज तक पूरा होते दिखाई नहीं पड़ रहा है। सरकार का रुख केवल जातीय संघर्ष बढ़ाने और प्रदेश की भाईचारा की डोर कमजोर करने का ही दिखाई पड़ रहा है जो प्रदेश की प्रगति में बाधक है।
dharmpath.com dharmpath