लखनऊ, 23 अक्टूबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री व बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने हरियाणा के फरीदाबाद में दलित बच्चों को जिंदा जला दिए जाने की घटना पर केंद्रीय मंत्री वी.के. सिंह की टिप्पणी की निंदा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि यदि मोदी सही मायने में बाबा साहब अम्बेडकर का सम्मान करते हैं, तो सिंह को तत्काल मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर उनके खिलाफ मामला दर्ज करवाएं।
मायावती ने यहां अपने आवास पर शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, “बिहार चुनावों को देखते हुए राहुल वहां दलितों के आंसू पोंछने पहुंचे। केंद्र में जब कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार थी तो हरियाणा से बड़ी संख्या में दलितों का पलायन हुआ, लेकिन तब उन्होंने इसको लेकर कोई कदम नही उठाया।”
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत द्वारा अपने दशहरा भाषण में अम्बेडकर को सामाजिक समानता का बहुत बड़ा पैरोकार बताने को मायावती ने नाटक करार दिया।
उन्होंने कहा कि अम्बेडकर को लेकर भागवत बड़ी-बड़ी बयानबाजी करते हैं, लेकिन उन्हें सही मायने में दलितों की चिंता है तो वह दलितों के खिलाफ टिप्पणी करने वाले मंत्री पर कार्रवाई करवाएं।
वहीं, प्रधानमंत्री मोदी से मायावती ने दो टूक कहा कि यदि उनमें यदि हिम्मत है तो वह सिंह के खिलाफ कार्रवाई करें, नहीं तो दलित समाज समझेगा कि अम्बेडकर को दिया जाने वाला आदर और सम्मान झूठा और दिखावा है।
उन्होंने कहा, “पिछले तीन-चार महीने के दौरान केंद्र सरकार ने जिस तरह से बाबा साहब को आदर व सम्मान दिया है, वह काफी अच्छी बात है। लेकिन मोदी सरकार के मंत्री जिस तरह से दलित विरोधी बयान दे रहे हैं, उससे यही लगता है कि अम्बेडकर को दिया जाने वाला सम्मान सिर्फ नाटक है।”
ज्ञात हो कि केंद्रीय मंत्री वी. के. सिंह ने फरीदाबाद में दलित बच्चों को जिंदा जला दिए जाने पर सरकार की जिम्मेदारियों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच गलत सादृश्य पेश करते हुए कहा था कि यदि कोई कुत्ते को पत्थर मारेगा तो इसमें सरकार क्या करेगी?
मायावती ने कहा, “हरियाणा में दलितों पर हुआ अत्याचार उनके प्रति लोगों की मानसिकता को दर्शाता है।”
मायावती ने हरियाणा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “केंद्र सरकार के इशारे पर मुख्यमंत्री (मनोहरलाल खट्टर) दलितों के घर घड़ियाली आंसू बहाने पहुंचे थे। उनके मन में दलितों को लेकर कोई अच्छी भावना नहीं है। फरीदाबाद कांड में जांच की सिफारिश भी महज मामले को रफा-दफा करने के लिए है।”
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