‘अलग-थलग रहने के बजाय एक छत के नीचे आएं क्षेत्रीय फिल्में’

अरुं धति बनर्जी

अरुं धति बनर्जी

मुंबई, 14 मार्च (आईएएनएस)। पर्पल पेबल पिक्चर्स की मधु चोपड़ा का कहना है कि भारत के विवधि क्षेत्रीय फिल्म उद्योग के पास भारतीय सिनेमा को आगे बढ़ाने की शक्ति है और व्यापक प्रभाव के लिए इसे एक ही छत के नीचे लाना चाहिए।

पर्पल पेबल पिक्चर्स ने भोजपुरी, मराठी, पंजाबी, सिक्किमी, असमी और बांग्ला जैसी क्षेत्रीय भाषाओं में फिल्में बनाई है। मधु चोपड़ा अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा की मां हैं।

मधु से जब पूछा गया कि एक भाषा के बजाय उन्होंने अलग-अलग भाषाओं में फिल्म बनाने का फैसला क्यों किया तो उन्होंने आईएएनएस को बताया, “मुझे लगता है कि बॉलीवुड की तुलना में अधिकांश क्षेत्रीय फिल्म उद्योग छोटे हैं..इसलिए अलग-थलग होने के बजाय, भारतीय फिल्म उद्योग के रूप में बढ़ने के लिए सभी क्षेत्रीय फिल्म उद्योगों को एक ही छत के नीचे आना चाहिए।”

इस बैनर के तले ‘बम बम बोल रहा काशी’, ‘व्हेंटिलेटर’ और ‘सर्वनन’ जैसी फिल्में बनाई गई हैं।

यह पूछे जाने पर कि जिस भाषा से वह परिचित भी नहीं हैं, उस भाषा में फिल्म बानने के लिए उनके अंदर आत्मविश्वास कहां से आता है, “यह कहानी की शक्ति है, जिसका हम जश्न मनाते हैं। चाहे ये फिल्म महोत्सवों में प्रदर्शित हों या इन्हें समीक्षकों की सराहना मिले..हम यहां कुछ अच्छी कहानियों का समर्थन करने के लिए हैं।”

उन्होंने कहा, “और हमारा मानना है कि फिल्म में पैसा लगाना उसकी कहानी पर निर्भर है, न कि यह योजना बनाकर कि हम इसे फिल्म महोत्सवों में दिखाएंगे या इसे व्यावसायिक रूप से रिलीज करेंगे। हमने नई प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए कंपनी शुरू किया था, तो हमारी प्राथमिकता यह है।”

उनका ध्यान अपने प्रोडक्शन की फिल्मों को ज्यादा से ज्यादा दर्शकों तक पहुंचाने पर भी है।

मधु ने कहा कि वह अपने बैनर की हिंदी में डब फिल्मों को रिलीज कर बड़ी संख्या में दर्शकों तक पहुंच बनाने की योजना बना रही है। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा में डब कर फिल्म को रिलीज करने से लोग बिना किसी भाषाई बाधा के कहानी का आनंद ले सकेंगे।

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