सिलचर, 27 नवंबर (आईएएनएस)। नया ब्रॉड गेज रेलमार्ग बनने के बाद असम की सुहानी बराक घाटी में 21 नवंबर को एक पैसेंजर रेलगाड़ी के प्रवेश करने के साथ ही आर्थिक रूप से पिछड़े इस क्षेत्र में अच्छे दिन आने की उम्मीद जग गई है।
सिलचर, 27 नवंबर (आईएएनएस)। नया ब्रॉड गेज रेलमार्ग बनने के बाद असम की सुहानी बराक घाटी में 21 नवंबर को एक पैसेंजर रेलगाड़ी के प्रवेश करने के साथ ही आर्थिक रूप से पिछड़े इस क्षेत्र में अच्छे दिन आने की उम्मीद जग गई है।
ब्रिटिश राज के समय से इस क्षेत्र में मीटर गेज रेलमार्ग था, जबकि असम के अन्य हिस्सों तक ब्रॉड गेज पहुंच चुका है।
यहां असम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर विश्वतोष चौधरी ने आईएएनएस से कहा, “2015 घाटी के लिए ऐतिहासिक वर्ष है। ब्रॉड गेज से हमारी अर्थव्यवस्था में और समग्र विकास में तेजी आएगी।”
उन्होंने हालांकि शिकायती लहजे में कहा, “अंग्रेजों ने मीटर गेज बनाने में आठ साल लगाए थे। राजनीति और निहित स्वार्थ के कारण हालांकि इस 210 किलोमीटर मार्ग पर ब्रॉड गेज बनने में 19 साल लग गए।”
सिलचर-लुमडिंग गेज रूपायन संग्राम कमेटी के अजय राय ने नए रेलमार्ग को आम जनता की जीत बताया।
राय ने आईएएनएस से कहा, “सरकार की बेरूखी के कारण और जनप्रतिनिधियों की असफलता के कारण सपने सच होने में 19 साल लगे।”
उन्होंने हालांकि काम की गुणवत्ता पर संदेह जताया और कहा, “प्रधानमंत्री कार्यालय को हमारी चिंता को देखते हुए जांच करनी चाहिए।”
सिलचर के पत्रकार सयान बिश्वास ने कहा, “हमें पता है कि कुछ समस्या है। हमें बारिश होने तक का इंतजार करना होगा। पहाड़ी पर भूस्खलन आम बात है। इससे सप्ताहों या महीने भर तक आवागमन प्रभावित हो सकता है।”
उन्होंने कहा कि राजनीतिक पार्टियां श्रेय ले रही हैं, लेकिन यह आम जनता की जीत है।
यह घाटी असम के सर्वाधिक पिछड़े इलाकों में से है।
असम के लुमडिंग से सिलचर तक रेलमार्ग को मीटर गेज से ब्रॉड गेज में बदलने का काम 1996 में तत्कालीन प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा द्वारा सिलचर में शिलान्यास से शुरू हुआ था।
रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने 27 मार्च को इस मार्ग पर माल गाड़ी का संचालन शुरू किया था। उन्होंने इस मार्ग को बराक घाटी, त्रिपुरा, मणिपुर और मिजोरम के लिए जीवन रेखा बताया था।
घाटी के एक गैर सरकारी संगठन सिटिजंस फोरम के संयुक्त सचिव ध्रुव कुमार साहा ने आईएएनएस से कहा कि यह देखना है कि इस मार्ग पर राजधानी और शताब्दी गाड़ियां चल सकती हैं या नहीं।
नए मार्ग की सराहना करते हुए दिल्ली में वित्तीय पेशेवर सिलचर निवासी आलोक शुक्ल ने आईएएनएस से कहा, “यह सपना सच होने जैसा है। नए मार्ग से मेरे जैसे पेशेवर आसानी से घाटी जा सकते हैं। मुझे लगता है कि हमारे लिए अच्छे दिन आ गए हैं।”
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