नई दिल्ली, 14 दिसंबर (आईएएनएस)। चालू पेराई सत्र 2017-18 (अक्टूबर-सितंबर) में देश में चीनी का उत्पादन 251 लाख टन रहने का अनुमान है। इंडियन सुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) ने यह जानकारी दी।
इस्मा की 83वीं सालाना आम बैठक के दौरान गुरुवार को आईएएनएस से बातचीत में इस्मा महानिदेशक अविनाश वर्मा ने बताया कि इस साल चीनी उत्पादन और खपत लगभग समान रहने की संभावना है क्योंकि देश का सालाना खपत भी 252 लाख टन के आस पास रह सकती है।
उन्होंने कहा कि मांग और पूर्ति समान रहने के कारण कीमतों में भी स्थिरता बनी रह रह सकती है।
चीनी की मिल दरों में (एक्स सुगर-मिल रेट्स) में हालिया गिरावट को अविनाश वर्मा ने चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा, ” कुछ कमजोर चीनी मिलों पर गóो का दाम किसानों को अदा करने का दबाव था इसलिए उन्होंने कम कीमतों पर चीनी बेचना शुरू कर दिया। दूसरी जो बड़ी वजह रही है वह अगले सत्र का अनुमान है। चूंकि चीनी वर्ष 2018-19 के लिए बढ़ा-चढ़ा कर अनुमान पेश किया गया जोकि एक तरह की अफवाह थी, उसे तथ्य से कुछ भी लेना-देना नहीं था। इसलिए चीनी कीमतों पर दबाव देखा गया।”
अभी उत्तर प्रदेश में में चीनी की मिल दरें 3400 रुपये प्रति क्विंटल है जबकि यह महाराष्ट्र में चीनी मिलें 3200 रुपये प्रति क्विंटल पर चीनी बेच रही हैं। इन दरों पर चीनी मिलों को घाटा हो रहा है क्योंकि उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में उत्पादन लागत क्रमश: 3500 रुपये और 3400 रुपये प्रति क्विं टल आती है।
पिराई सत्र 2017-2018 (अक्टूबर से सितंबर) में चीनी का उत्पादन 251 लाख टन रहा जबकि 2016-2017 में यह 203 लाख टन था। 2017-2018 में उत्तर प्रदेश में चीनी का उत्पादन 101 लाख रहने का अनमुान है।
वहीं, महाराष्ट्र में इस साल चीनी का उत्पादन 74 लाख टन रह सकता है। कर्नाटक की चीनी मिलें 25 लाख टन चीनी का उत्पादन कर सकती हैं। लेकिन तमिलनाडू में चीनी के उत्पादन में पिछले साल के मुकाबले कमी आने की संभावना है। इस्मा महानिदेशक ने तमिलनाडू में पिछले साल के 11 लाख टन के मुकाबले चीनी का उत्पादन छह लाख टन रहने की संभावना जताई है।
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