न्यूयार्क, 7 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी नीतियों की परोक्ष आलोचना करते हुए कहा कि दुनिया को आंतकवादियों को बुरे और खराब में बांटकर देखना बंद करना होगा।
मोदी ने ‘टाइम’ पत्रिका को दिए साक्षात्कार में कहा है, “हमें आंतकवाद को नाम लिखी तख्तियों के रूप में नहीं देखना चाहिए कि वे किस आतंकवादी समूह से आते हैं, उनकी भौगोलिक स्थिति क्या है और उनसे पीड़ित होने वाले कौन हैं।”
प्रधानमंत्री ने कहा, “इस तरह के समूह या उनके नाम बदलते रहते हैं। आज आप तालिबान या आईएसआईएस को देख रहे हैं, कल हो सकता है ये आपको किसी और नाम से दिखाई दें।”
अपनी सरकार के एक वर्ष पूरा होने पर मोदी ने अपने साक्षात्कार में कहा कि आतंकवाद को राजनीतिक नजरिए से देखना बंद करना बेहद अहम है, बल्कि इसे मानवीय मूल्य के आधार पर मानवता के खिलाफ एक ताकत की तरह विश्लेषित करने की जरूरत है।
मोदी ने कहा, “अगर आप सीरिया में आतंकवाद को किसी और नजरिए से और सीरिया के बाहर आतंकवाद को दूसरे नजरिए से देखते हैं तो इससे परेशानी खड़ी हो सकती है।”
उन्होंने आगे कहा, “अगर आप आतंकवाद को श्रेणियों में देखते हैं, जैसे अच्छा आतंकवाद या बुरा आतंकवाद तो इससे भी चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। इसी तरह यदि आप तालिबान को अच्छा तालिबान या बुरा तालिबान के रूप में देखते हैं तो इससे अपनी तरह की परेशानियां खड़ी हो सकती हैं।”
मोदी ने कहा, “हमें इन प्रश्नों को व्यक्तिगत तौर पर नहीं देखना चाहिए। हमें इन समस्याओं पर एकस्वर होना पड़ेगा, न कि अलग-अलग, क्योंकि आतंकवाद की समस्या पर इसके कारण दुनिया का ध्यान बंटा हुआ रह जाता है। मेरा मानना है कि इसे आसानी से किया जा सकता है।”
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र के अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद व्यापक संधि को मंजूरी दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा, “इससे कम से कम यह स्पष्ट होगा कि आप किसे आतंकवादी के तौर पर देखें और किसे नहीं। हमें आतंकवाद को धर्म से जोड़ना बंद करना होगा ताकि आतंकवादियों को अलग-थलग किया जा सके, क्योंकि ये आतंकवादी अपनी बात रखने के लिए इसी धर्म का सहारा लेते हैं।”
dharmpath.com dharmpath