नई दिल्ली, 20 दिसम्बर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि युवाओं को आतंकवाद, अतिवाद और कट्टरवाद जैसी समान चुनौतियों का शिकार बनने से रोकने के लिए भारत और किर्गिस्तान ने एक साथ मिलकर काम करने का संकल्प लिया है।
प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद मोदी ने भारत के दौरे पर आए किर्गिस्तान के राष्ट्रपति अलमाजबेक आतमबेयेव के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, “दोनो पक्षों ने हमारे समान प्राथमिकता वाले द्विपक्षीय सहयोग में विविधता लाने और उसे प्रगाढ़ बनाने पर ध्यान दिया।”
मोदी ने कहा, “हमने यह भी चर्चा की कि आतंकवाद, अतिवाद और कट्टरवाद की समान चुनौतियों से हमारे युवाओं और समाज की रक्षा के लिए हम कैसे मिलकर काम कर सकते हैं।”
प्रधानमंत्री ने कहा, “हम सहमत हुए कि दोनों देशों के समान लाभ के लिए इन चुनौतियों से निपटने के लिए घनिष्ठतापूर्वक काम करना चाहिए।”
मोदी ने कहा कि भारत मध्य एशिया को एक दीर्घकालिक शांति, स्थिरता और समृद्धि का क्षेत्र बनाने के समान प्रयास में किर्गिस्तान को एक बहुमूल्य साझीदार के रूप में मानता है।
रक्षा सहयोग के क्षेत्र में भी दोनों पक्षों के बीच हुई चर्चा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “किर्गिस्तान-भारत पर्वतीय जैव चिकित्सा अनुसंधान केंद्र सफल सहयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।”
मोदी ने यह भी कहा कि दोनों देशों ने किर्गिस्तान गणराज्य में एक किर्गिज-भारत संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना पर काम शुरू कर दिया है।
द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग पर भी जोर देते हुए उन्होंने कहा कि वह और राष्ट्रपति आतमबेयेव हमारी अर्थव्यवस्थाओं को और मजबूती से जोड़ने की जरूरत पर सहमत हुए हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा, “हम स्वास्थ्य देखभाल, पर्यटन, सूचना प्रौद्योगिकी, कृषि, खनन और उर्जा के क्षेत्र में अवसरों के दोहन के लिए दोनों देशों के उद्योग और व्यापार को प्रोत्साहन देंगे।”
इस तरह की पहलों के केंद्र में लोगों के रहने की बात करते हुए मोदी ने कहा, “किर्गिस्तान गणराज्य के साथ हमारे तकनीकी और आर्थिक कार्यक्रम के तहत हम युवाओं के आदान-प्रदान पर विशेष जोर देंगे। आज समझदारी के जो निष्कर्ष निकले हैं, वे इन दिशाओं में हमारे जोर का समर्थन करेंगे।”
दोनों देशों के व्यापारियों को प्रोत्साहन देने के लिए किर्गिज-भारत कोष की स्थापना की पहल के लिए राष्ट्रपति आतमबेयेव ने अपनी ओर से मोदी को धन्यवाद दिया।
दोनों देशों के बीच व्यापार में विस्तार पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “आज हमारे पास जो है उससे हम खुश नहीं हैं।”
आतमबेयेव ने भारतीय विशेषज्ञों के साथ उच्च प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी सहयोग की इच्छा जाहिर की।
प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने मंगलवार को छह समझौतों पर दस्तखत किए जिनमें युवा मामलों, पर्यटन, कृषि, प्रसारण और दृश्य एवं श्रव्य विषय वस्तु साझा करने के क्षेत्रों में सहयोग शामिल हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार, वृहत आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों ने अलग से द्विपक्षीय निवेश संधि पर भी दस्तखत किए।
इससे पहले राष्ट्रपति भवन में यहां राष्ट्रपति आतमबेयेव का औपचारिक स्वागत किया गया। वह भारत के चार दिवसीय दौरे पर यहां रविवार को पहुंचे।
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