नई दिल्ली, 13 जनवरी (आईएएनएस)। अमेरिका के एक अधिकारी ने बुधवार को कहा कि भारत और अमेरिका जैसे देशों के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है कि अगर उन्हें आतंकवाद से निपटना है तो वे घृणा और हिंसा की चुनौतियों का भी उसी शिद्दत से मुकाबला करें।
नागरिक सुरक्षा, लोकतंत्र और मानवाधिकार मामलों की अमेरिका की सहायक मंत्री साराह बी. सेवाल ने कहा कि धर्माधता को सही ठहराने और किसी धार्मिक समूह के खिलाफ भेदभाव करने से आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में मदद नहीं मिलेगी।
उन्होंने यहां विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन में कहा, “सरकारें नागरिक समाज पर लगे कड़े नियमों को हटाकर मदद दे सकती हैं और नागरिक समूहों को संवेदनशील मुद्दों पर शांतिपूर्ण आयोजन की अनुमति दे सकती हैं। वे एक कदम आगे बढ़कर उन समुदायों से रिश्ते बनाने की पहल कर सकती हैं, जिन्हें अपने में भर्ती करने के लिए हिंसक चरमपंथी सक्रिय हैं।”
आतंकवाद को भारत और अमेरिका का साझा शत्रु बताते हुए उन्होंने कहा कि चुप्पी अपराधी और क्रूर को शह देती है, जैसा कि बीते सितंबर में एक मुस्लिम आदमी की पीट-पीटकर हुई हत्या में हुआ या ओडिशा में गिरजाघरों को जलाने में दिखा।
सेवाल ने कहा, “अतीत से सबक लेते हुए, हमें धर्माधता और किसी धार्मिक या जातीय समूह, जिसमें हमारे मुस्लिम बहन-भाई भी शामिल हैं, के खिलाफ भेदभाव के लिए सुरक्षा की आड़ नहीं लेनी चाहिए।”
उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका, दोनों जगहों पर हिंसक चरमपंथी हैं। उन्होंने कहा, “हमें अपने मूल्यों पर बने रहना चाहिए। धार्मिक आजादी, सभी को कानूनी संरक्षण देना चाहिए और भेदभाव व सभी तरह की घृणा के खिलाफ बोलना चाहिए।”
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