भोपाल, 23 सितम्बर (आईएएनएस)। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री चौधरी वीरेन्द्र सिंह ने कहा कि गांवों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाकर ही आदर्श ग्राम की कल्पना को साकार किया जा सकता है। इसके लिए गांव की अर्थव्यवस्था में व्यापक परिवर्तन लाने होंगे।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में विधानसभा के मानसरोवर सभागार में बुधवार को शुरू हुई सांसद आदर्श ग्राम योजना पर केंद्रित दो दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन मौके पर केंद्रीय मंत्री सिंह ने यह बात कही। उद्घाटन कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की।
इस कार्यशाला में देश भर से आए 100 सांसद, 125 जिलाधिकारी, 125 जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी व 100 अन्य अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री सिंह ने कहा कि देश में गांवों के 300 कलस्टर विकसित किए जाएंगे। पच्चीस से पचास हजार जनसंख्या वाले इन कलस्टरों को ऐसे विकसित किया जाएगा कि इनमें सारी सुविधाएं उपलब्ध हों। गांव के विकास की कल्पना में केवल गांव में मौलिक सुविधाएं उपलब्ध कराना नहीं बल्कि गांव को आर्थिक तौर पर सक्षम बनाना भी है। आर्थिक रूप से सक्षम गांव ग्रामीणों को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराएंगे।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जन-धन योजना ने लोगों को आर्थिक रूप से जोड़ने का काम किया है। सांसद आदर्श ग्राम योजना गांव को जोड़ने की नई सोच विकसित करती है। विकास की जो कल्पना हमारे युवाओं के मन में है वह गांव में पूरी हो तब ही विकास की सार्थकता है। उन्होंने कहा कि सांसदों के संरक्षण में गांवों की सोच बदलेगी। सांसद पहल करके ग्राम विकास योजना का हिस्सा बनें। आगामी दो अक्टूबर 2016 के पहले सभी आदर्श ग्रामों की प्राथमिकताएं पूरी की जाएगी।
मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि भारत की कल्पना बिना गांव के नहीं की जा सकती। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सांसद आदर्श ग्राम योजना की संकल्पना इसी सोच के अनुसार की है। गांवों में शहरों जैसी अधोसंरचना स्कूल, सड़क, स्वास्थ्य, अस्पताल, पीने का पानी, बिजली आदि उपलब्ध कराने के साथ ही वहां रोजगार के अवसर पैदा करने होंगे।
चौहान ने पूर्ववर्ती व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि पहले हर ग्राम एक सम्पूर्ण इकाई होता था। सांसद आदर्श ग्राम योजना में मेरा गांव की भावना को जोड़ना होगा। मेरे गांव की प्रतिष्ठा मेरी है यह भाव ग्रामीणों में पैदा करना होगा।
उन्होंने राज्य की स्मार्ट विलेज योजना का नाम बदलने की बात कही। उन्होंने कहा कि वैसे तो ‘स्मार्ट’ शब्द सभी के लिए आम है, मगर वे इसमें बदलाव चाहते है। स्मार्ट के स्थान पर किस शब्द का इस्तेमाल किया जा सकता है, उस पर विचार किया जाएगा।
इस कार्यशाला में मौजूद केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्री थावरचन्द गहलोत ने कहा कि गांव को आदर्श बनाने का अर्थ देश को आदर्श बनाना है। किसी आदर्श ग्राम के दो पहलू हैं अधोसंरचना तथा सामाजिक विकास और सुरक्षा। दोनों पहलू पर समग्र रूप से विकास किया जाना चाहिए।
गहलोत ने कहा कि केन्द्रीय सामाजिक न्याय विभाग ने देश के दस राज्य में अनुसूचित जाति बहुल 200-200 गांव का चयन विकास के लिए किया है। इनमें प्रति ग्राम 20 लाख रुपये उपलब्ध कराए जाएंगे। हाथ से मैला ढोने की प्रथा समाप्त करने के लिए सामाजिक न्याय विभाग द्वारा विशेष अभियान चलाया जा रहा है। सामाजिक सुरक्षा किसी भी आदर्श ग्राम के लिए आवश्यक है।
कार्यशाला के उद्घाटन मौके पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीताशरण शर्मा, केन्द्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री सुदर्शन भगत, प्रदेश के ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव, राज्य की अपर मुख्य सचिव ग्रामीण विकास अरुणा शर्मा उपस्थित थी।
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