आपदा : लू से निपटने की अग्रिम तैयारियों पर कार्यशाला

हैदराबाद, 22 फरवरी (आईएएनएस)। गर्मी में लू से निपटने की अग्रिम तैयारियों पर यहां एक राष्ट्रीय कार्यशाला बुधवार को शुरू हुई। यह दो दिवसीय कार्यशाला राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) द्वारा तेलंगाना सरकार के सहयोग से आयोजित की गई है।

इस अवसर पर एनडीएमए के सदस्य आर. के. जैन ने कहा, “वर्ष 2015 में ग्रीष्म लहर के कारण हुई मौतों की संख्या किसी अन्य आपदा के कारण हुई मौतों की तुलना में कहीं अधिक रही थी। इस पृष्ठभूमि में एनडीएमए ने 2016 में ग्रीष्म लहरों के प्रबंधन के लिए दिशा-निर्देश तैयार किए।”

एनडीएमए के अन्य सदस्य डी.एन. शर्मा ने कहा, “अग्रिम योजना और तैयारियों तथा सभी हितधारकों की सक्रिय भागीदारी से न केवल मौतों को, बल्कि ग्रीष्म लहरों के कारण होने वाली बीमारियों को भी कम किया जा सकता है।”

एनडीएमए के संयुक्त सचिव डॉ. वी. थिरूप्पुगाज ने ग्रीष्म लहरों के रोकथाम और प्रबंधन पर प्रस्तुति दी और ग्रीष्म कार्य योजनाओं व मजबूत डेटाबेस के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि गर्मी की लहरों के प्रभाव को कम करने के लिए समुदायों को संवेदनशील बनाने के लिए जागरूकता अभियानों की जरूरत है।

एमसीआर-एचआरडी संस्थान (हैदराबाद) के एडीजी डॉ. के. तिरुपतियाह ने गर्मी की लहरों के प्रभाव को कम करने के लिए स्वदेशी परंपराओं और ज्ञान को पुनर्जीवित करने के महत्व का जिक्र किया और जागरूकता का संदेश फैलाने के काम में बच्चों और पंचायती राज्य संस्थानों को शामिल करने की जरूरत बताई।

ग्रीष्म लहर कार्य योजना और जोखिम न्यूनीकरण पर पहले तकनीकी सत्र में गर्मी की लहरों की रोकथाम और प्रबंधन के लिए ग्रीष्म कार्य योजनाओं के विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया। दूसरे सत्र में आंध्र प्रदेश, गुजरात, तेलंगाना, ओडिशा और महाराष्ट्र ने दूसरे राज्यों को ग्रीष्म लहर कार्य योजनाओं को तैयार कराने में हुए अपने अनुभव और श्रेष्ठ प्रक्रियाओं को साझा किया। ये राज्य सबसे अधिक गर्मी से प्रभावित राज्य हैं, जो बेहतर तैयारी और उचित उपायों के द्वारा ग्रीष्म लहरों के प्रभाव को काफी हद तक कम करने में सक्षम रहे हैं।

इस कार्यशाला का उद्देश्य पिछले साल तैयार की गई और परिचालित कार्ययोजना की तैयारी के लिए एनडीएमए के दिशा-निर्देश ‘ग्रीष्म लहर की रोकथाम और प्रबंधन’ के अनुसार राज्यों को अपनी ग्रीष्म लहर कार्य योजनाओं को तैयार करने के लिए संवेदनशील बनाना है।

इस कार्यशाला से 2017 के लिए ग्रीष्म लहर (लू) की आशंका वाले राज्यों को अपनी योजनाएं तैयार करने में मदद मिलेगी, क्योंकि देश के विभिन्न भागों में ग्रीष्म लहर की मार मार्च के अंतिम पखवाड़े में शुरू हो जाती है। पिछले वर्ष गर्मी से बुरी तरह प्रभावित कुछ राज्यों में ग्रीष्म कार्य योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से देश में गर्मी की लहर से होने वाली मौतों की संख्या में लगभग 50 प्रतिशत कमी आई थी।

About admin


Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (0) in /home4/dharmrcw/public_html/wp-includes/functions.php on line 5493