चेन्नई, 29 जनवरी (आईएएनएस)। देश के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को पिछले आम बजट में आगामी दो दशकों में परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए 3,000 करोड़ रुपये आवंटित किए जाने का आश्वासन मिलने के बाद 2017-18 के आम बजट से कोई उम्मीद नहीं है। परमाणु ऊर्जा समिति (एईसी) के अध्यक्ष ने यह बात कही।
चेन्नई, 29 जनवरी (आईएएनएस)। देश के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को पिछले आम बजट में आगामी दो दशकों में परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए 3,000 करोड़ रुपये आवंटित किए जाने का आश्वासन मिलने के बाद 2017-18 के आम बजट से कोई उम्मीद नहीं है। परमाणु ऊर्जा समिति (एईसी) के अध्यक्ष ने यह बात कही।
परमाणु ऊर्जा समिति (एईसी) के अध्यक्ष और परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) के सचिव शेखर बसु ने कहा, “अन्य उद्योगों के विपरीत, हमें आम बजट से कोई नई उम्मीद नहीं है। हां, यह सही है कि पिछले साल केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने परमाणु ऊर्जा क्षमता के विस्तार के लिए सालाना अतिरिक्त 3,000 करोड़ रुपये आवंटित करने की घोषणा की थी।”
बसु ने कहा, “अब हमारा ध्यान 700 मेगावाट के 10 और दबावयुक्त भारी जल रियेक्टर (पीएचडब्ल्यूआर) स्थापित करना है। पीएचडब्ल्यूआर हमारी स्वदेशी तकनीक है। बिजली उत्पादन क्षमता के विस्तार के अलावा इससे परमाणु क्षेत्र के घरेलू उद्योगों को भी और सौदे मिलेंगे।”
जेटली ने 2016-17 का बजट पेश करते हुए कहा, “बिजली क्षेत्र में दीर्घकालिक स्थिरता के लिए हमें बिजली उत्पादन के स्रोतों में विविधता लाने की जरूरत है। सरकार परमाणु ऊर्जा उत्पादन में निवेश बढ़ाने के लिए अगले 15 से 20 सालों के लिए एक व्यापक योजना तैयार कर रही है।”
परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक एस.के. शर्मा ने भी बसु की बात दोहराते हुए आईएएनएस से कहा, “जब परियोजना तैयार की जाती है, तो सरकार से चर्चा के बाद ही उसके वित्तपोषण पर फैसला लिया जाता है।”
शर्मा ने कहा कि रियेक्टर्स लगाने के लिए स्वदेशी और विदेशी दोनों जगहों पर नए स्थान तलाशे जा रहे हैं।
सरकार ने संसद में उठे एक सवाल के जवाब में कहा है कि उसने हरियाणा, मध्यप्रदेश, राजस्थान और कर्नाटक में 700 मेगावाट की 14 इकाइयां लगाने की सैद्धांतिक मंजूरी ले ली है।
बसु ने कहा कि भारत रूस से 1,000 मेगावाट की इकाइयां लेने के बाद उससे वीवीईआर 1,200 मेगावाट रियेक्टर्स लेगा।
उन्होंने कहा कि छह रूसी रियेक्टरों की अगली खेप को लगाने के लिए विभिन्न स्थानों का मुआयना किया जा रहा है।
बसु ने कहा, “इसके लिए किसी तटीय स्थान की तलाश की जा रही है।”
उन्होंने साथ ही कहा कि इसके लिए संभावित स्थान के लिए आंध्र प्रदेश पर भी गौर किया जा जा सकता है।
रूसी परमाणु ऊर्जा कंपनी ‘रोसाटम’ के अनुसार, वह बेलारूस में ऐसे दो वीवीईआर रिएक्टरों का निर्माण कर रहा है।
वीवीईआर रिएक्टर यानी वोडो-वोड्यनोई एनर्जेटिचेस्की रियेक्टर्स को अंग्रेजी में वॉटर-वॉटर एनर्जेटिक रियेक्टर्स के नाम से जाना जाता है।
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