नई दिल्ली, 28 मार्च (आईएएनएस)। राज्यसभा में मंगलवार को विपक्षी दलों द्वारा अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आयोगों में रिक्तियों का मुद्दा उठाकर हंगामा किए जाने के कारण सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। बाद में अपराह्न तीन बजे के आसपास कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।
सदन की कार्यवाही शुरू होने के बाद ही इस मुद्दे पर हंगामा शुरू हो गया, जिसके कारण इसे 10 मिनट के लिए पूर्वाह्न 11.25 बजे तक स्थगित कर दिया गया, जिसके बाद कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
समाजवादी पार्टी (सपा) के रामगोपाल यादव तथा बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने शून्यकाल के दौरान मुद्दे को उठाया।
रामगोपाल यादव ने कहा कि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग का नाम बदलने के पीछे सरकार का इरादा कुछ खास जातियों को निशाना बनाकर उन्हें ‘पिछड़ी जातियों’ के दायरे से बाहर निकालना है।
मायावती ने सरकार से पूछा कि क्या उसकी योजना सभी आयोगों को समेटने की तो नहीं है।
इसके बाद, मंत्रियों एम.वेंकैया नायडू तथा मुख्तार अब्बास नकवी सरकार के समर्थन में उठ खड़े हुए।
हंगामे के बीच नायडू ने कहा, “सभी आयोग काम कर रहे हैं। सभी रिक्तियां भरी जा रही हैं। सरकार के इरादों पर सवाल उठाना गलत है।”
लेकिन विपक्षी सदस्यों ने हंगामा जारी रखा, जिसके कारण सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई।
लेकिन विपक्षी पार्टियों के सदस्यों का प्रदर्शन जारी रहा। इस बीच सदन की कार्यवाही दूसरी बार दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
इसके बाद, सदन की कार्यवाही शुरू होने पर भी हंगामा जारी रहा, जिसके कारण तीसरी बार दोपहर 12.30 बजे तक के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। सदन की कार्यवाही फिर शुरू होने पर भी जब हंगामा जारी रहा, तो दोपहर दो बजे तक के लिए इसे स्थगित कर दिया गया।
प्रश्नकाल के दौरान नकवी ने हंगामे के बीच कहा कि आयोगों में नियुक्तियां चल रही हैं और विलंब पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के कारण आदर्श आचार संहिता के लागू रहने के कारण हुआ।
नकवी ने कहा, “ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि इन आयोगों में नियुक्तियों में विलंब हुआ है। इससे पहले भी नियुक्तियां छह महीने से एक साल के लिए विलंबित हुई हैं।”
दोपहर भोजन के बाद सदन की कार्यवाही शुरू होने पर विपक्षी सदस्यों ने इस विषय पर नियम 267 के तहत चर्चा की मांग की और सरकार से सप्ताह भर के भीतर इन पदों पर नियुक्तियां करने का आश्वासन मांगा।
हालांकि, लोकसभा अध्यक्ष ने नियम 267 के तहत दिए गए चारों नोटिस में से किसी को भी स्वीकार नहीं किया।
विपक्षी सांसद चर्चा पर जोर देते हुए आसंदी के पास इकट्ठा हो गए।
उपसभापति पी.जे.कुरियन ने बुधवार को दोपहर के भोजन के बाद इस पर चर्चा करने का प्रस्ताव दिया, लेकिन सांसद तैयार नहीं हुए।
इसके बाद कुरियन ने सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी।
वित्तमंत्री अरुण जेटली को दोपहर 3.30 बजे वित्त विधेयक 2017 पर चर्चा के तहत जवाब देना था।
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