नई दिल्ली, 29 मई (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह तथा सात अन्य आरोपियों को एक स्थानीय अदालत ने आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति के मामले में सोमवार को जमानत दे दी।
विशेष न्यायाधीश वीरेंद्र कुमार गोयल ने वीरभद्र सिंह तथा अन्य आरोपियों से एक-एक लाख रुपये का निजी मुचलका तथा इतनी ही जमानत राशि जमानत के रूप में जमा करने का आदेश दिया।
अदालत ने बिना अनुमति के आरोपियों को देश नहीं छोड़ने को कहा है।
अपनी जमानत याचिका में कांग्रेस नेता ने विभिन्न गंभीर बीमारियों से पीड़ित होने का दावा करने के लिए कई चिकित्सा रपट का हवाला दिया।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने इस आधार पर जमानत याचिका का विरोध किया कि वीरभद्र सिंह मामले के गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं।
सीबीआई ने कहा, “वीरभद्र सिंह राज्य के राजा है, और भ्रष्ट गतिविधियों में संलिप्त हैं। उनकी बीमारी आम है और इसलिए इस आधार पर उनपर विचार नहीं किया जाना चाहिए।”
वीरभद्र सिंह तथा उनकी पत्नी 22 मई को अदालत में पेश हुए थे और जमानत की मांग की थी।
मामले में सीबीआई ने वीरभद्र सिंह, उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह के अतिरिक्त जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के एजेंट आनंद चौहान, उनके सहयोगी चुन्नी लाल, जोगिंदर घालटा, प्रेम राज, लवन कुमार रोच, वकमुल्लाह चंद्रशेखर तथा राम प्रकाश भाटिया के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है।
आरोप है कि 28 मई, 2009 से 26 जून, 2012 तक कें द्रीय इस्पात एवं सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यम मंत्री ने आपराधिक कदाचार को अंजाम दिया।
वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह तथा आठ अन्य आरोपियों ने उनकी (वीरभद्र) रकम को अपनी पत्नी, बेटी तथा बेटे के नाम पर निवेश कर अपराध के लिए उकसाया।
सीबीआई ने आरोप लगाया कि सह-आरोपी प्रतिभा सिंह ने इरादतन काले धन को अपने तथा अपने बच्चों के नाम पर निवेश करने के लिए वीरभद्र सिंह को अपराध करने के लिए प्रेरित किया।
सीबीआई ने वरिष्ठ कांग्रेसी नेता पर आय से अधिक संपत्ति को कृषि आय के रूप में न्यायोचित ठहराने का प्रयास करने का आरोप लगाया।
dharmpath.com dharmpath