नई दिल्ली, 9 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) के भारत बंद के दौरान हुए संघर्ष के विरोध में सोशल मीडिया पर विभिन्न आरक्षण विरोधी संगठनों द्वारा बुलाए गए भारत बंद के मद्देनजर सभी राज्य सरकारों से किसी तरह की हिंसा व जान-माल के नुकसान से बचने के लिए विशेष रूप से सतर्क रहने के लिए कहा है।
सूत्रों ने कहा कि मंत्रालय ने खासतौर से राज्य सरकारों को जिला मजिस्ट्रेट और जिला पुलिस प्रमुखों को उनके अधिकार क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार बनाए जाने के लिए कहा है।
राज्यों को सुरक्षा-व्यवस्था मजबूत करने और जरूरत पड़ने पर निषेधाज्ञा जारी करने सहित किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए उचित व्यवस्था करने की सलाह दी गई है।
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि किसी तरह के जान-माल के नुकसान को रोकने के लिए राज्यों को सभी संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
इस बीच, केरल में 30 दलित संगठनों द्वारा बंद का आह्वान किए जाने के बाद सोमवार को राज्य में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ।
यह बंद अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति अधिनियम को कमजोर करने के खिलाफ आहूत किया गया है।
ट्रेड यूनियनों द्वारा देशभर में बुलाए गए बंद के चलते दो अप्रैल को भी राज्य में ऐसे ही बंद का असर देखने को मिला था।
सरकारी स्वामित्व वाले सड़क परिवहन निगम, निजी बस संचालकों और व्यापार निकाय ने इससे पहले ऐलान किया था कि परिवहन और कामकाज सामान्य रहेगा, लेकिन कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने बसों की आवाजाही रोकने के लिए सड़कें अवरुद्ध कर दी।
दुकानों, खासकर कन्नूर जिले की दुकानों को बंद रखने के लिए कहा गया।
कोल्लम में सरकारी बसों पर पत्थर फेंके गए। विश्वविद्यालयों की परीक्षाओं को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया गया है।
सर्वोच्च न्यायालय ने तीन अप्रैल को अपने फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था, जिसके बारे में कार्यकताओं का कहना है कि यह दलित और अनुसूचित जनजाति को संरक्षण प्रदान करने वाले कानून को कमजोर करता है।
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