नई दिल्ली, 19 अप्रैल (आईएएनएस)। समग्र इंटरनेट तैयारी के मामले में दिल्ली देश के शीर्ष राज्य के रूप में उभरा है और पिछले साल के विजेता महाराष्ट्र से आगे निकल गया है।
इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएएमएआई) और नीलसन द्वारा प्रकाशित ‘इंडेक्स ऑफ इंटरनेट रेडीनेस ऑफ इंडियन स्टेट्स’ स्टडी के मुताबिक, दिल्ली केवल छोटे राज्यों और संघ शासित प्रदेशों में ही नहीं बल्कि देश के सभी राज्यों में आगे है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अपने शानदार ई-बुनियादी ढांचे और ई-भागीदारी की वजह से दिल्ली को यह रैंक मिला है। दिल्ली के बाद कर्नाटक, महाराष्ट्र, केरल और तमिलनाडु का स्थान है।
सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की सचिव अरुणा सुंदरराजन ने रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि छोटे राज्यों में दिल्ली पहले स्थान पर है और इसके बाद दूसरे और तीसरे स्थान पर चंडीगढ़ और पुदुचेरी आते हैं।
उन्होंने कहा, “चंडीगढ़ ई-बुनियादी ढांचे और ई-भागीदारी दोनों में दूसरे स्थान पर है। ई-इंफ्रास्ट्रक्च र सूचकांक पर चंडीगढ़ के बाद पुदुचेरी का स्थान है।”
रिपोर्ट में कहा गया है कि छोटे राज्यों में पूर्वोत्तर के राज्य समग्र इंटरनेट तैयारी के मामले में निचले पायदान पर हैं। इसलिए, इस क्षेत्र में निवेश और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए बहुत कुछ करना जरूरी है। पूर्वोत्तर राज्यों में, नागालैंड सबसे ऊपर है। इसके बाद मणिपुर और त्रिपुरा का स्थान है। नागालैंड आईटी पर्यावरण में आगे है और अन्य श्रेणियों में अच्छी तरह से काम कर रहा है।
इंटरनेट तैयारी सूचकांक चार घटकों, ई-बुनियादी ढांचा, ई-भागीदारी, आईटी-पर्यावरण और सरकारी ई-सर्विस का समग्र बेंचमार्क इंडेक्स है। इस मॉडल में सभी चार घटकों के बराबर महत्व हैं। एक पांचवां सूचकांक (कोर इंटरनेट सूचकांक) इस वर्ष बनाया गया है। इंडेक्स का उद्देश्य भारतीय डिजिटल उद्योगों को भारतीय राज्यों में अपने कारोबार का विस्तार करने में मदद देना है।
रिपोर्ट में पाया गया है कि कर्नाटक, दिल्ली और महाराष्ट्र शीर्ष तीन राज्य हैं, जिनमें सबसे ज्यादा डिजिटल स्टार्टअप हैं। अध्ययन में कहा गया है कि देश में कुल 242 स्टार्टअप इन्क्यूबेटर में से 61 स्टार्टअप इनक्यूबेटर तमिलनाडु में हैं।
अरुणा का कहना है, “इंटरनेट तैयारी सूचकांक राज्यों के प्रदर्शन पर प्रकाश डालती है। ई-सेवाओं और ई-कॉमर्स में तेजी को देखते हुए राज्यों की ताकत और कमजोरियों को समझना आवश्यक है। यह व्यापार और सरकार को लाभ उठाने में मदद करेगा। जहां सुधार की जरूरत है, वहां नीतिगत उपाय भी अपनाए जा सकते हैं।”
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