नई दिल्ली, 26 मई (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने दो भारतीय मछुआरों की हत्या के आरोपी इतालवी नौसैनिक सार्जेट मेजर सेल्वाटोर गिरोन की जमानत शर्तो में गुरुवार को ढील दे दी, जिससे वह अपने देश जा सकेंगे।
गिरोन के साथ चीफ मास्टर सार्जेट मासीमिलियानो लैटोर भी इस मामले में आरोपी हैं। उन पर फरवरी 2012 में केरल के तट से दूर समुद्र में दो भारतीय मछुआरों की हत्या का आरोप है।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति प्रफुल्ल सी. पंत और न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ की अवकाश पीठ ने इटली की सरकार की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए जमानत शर्तो में ढील दी, ताकि गिरोन स्वदेश लौट सकें। इटली की सरकार की ओर से दाखिल आवेदन को भारत सरकार समार्थन प्राप्त था।
अवकाश पीठ ने अपने इस निर्णय से पहले भारत सरकार की ‘अनापत्ति’ भी रिकॉर्ड की।
अवकाश पीठ ने जमानत शर्तो में ढील देते हुए तीन नई शर्ते भी इसमें जोड़ी, जिन्हें अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल पी.एस. नरसिम्हा ने भारत सरकार की ओर से प्रस्तावित किया।
इसके अलावा अदालत ने कहा कि भारत में इटली के राजदूत वचन देंगे कि अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थ न्यायाधिकरण के निर्णय के बाद एक महीने के भीतर और जब भी सर्वोच्च न्यायालय इसकी जरूरत बताए, गिरोन भारत लौटेंगे।
गिरोन भारत में रोके गए इटली के उन दो नाविकों में से एक हैं, जिन पर 2012 में केरल तट से दूर दो भारतीय मछुआरों की हत्या का आरोप है। हत्या के अन्य आरोपी चीफ मास्टर सार्जेट मासीमिलियानो लैटोर हैं, जो पहले ही स्वास्थ्य आधार पर इटली में हैं।
सर्वोच्च न्यायालय ने यह आदेश मध्यस्थता न्यायाधिकरण के 29 अप्रैल के उस फैसले को देखते हुए दिया है, जिसमें भारत व इटली से गिरोन की वापसी में तब तक सहयोग करने के लिए कहा गया है, जब तक मध्यस्थता की कार्रवाई चल रही है।
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