वेंकटचारी जगन्नाथ
वेंकटचारी जगन्नाथ
श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश), 16 दिसम्बर (आईएएनएस)। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने बुधवार को अपने ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) को अंतरिक्ष में पुन: चालू करने का परीक्षण सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया। यह परीक्षण उस समय सफल हुआ, जब इसका इंजन सिंगापुर के छह उपग्रहों को छोड़ने के मिशन के दौरान रॉकेट से अलग हो गया।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष ए.एस. किरण कुमार ने आईएएनएस से कहा, “इंजन को फिर से चालू करने का परीक्षण सफल रहा। इंजन को लगभग पांच सेकंड तक चालू रखा गया। हम इस प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल अगले वर्ष कभी करेंगे।”
किरण कुमार के अनुसार, पीएसएलवी रॉकेट के जरिए छोड़े जाने वाले अगले तीन उपग्रह, नौवहन उपग्रह होंगे।
उन्होंने कहा कि उसके बाद कुछ बहु उपग्रह प्रक्षेपण होंगे और उसमें इस प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया जाएगा।
तरल प्रणोदन प्रणाली केंद्र के निदेशक एस. सोमनाथ ने आईएएनएस से कहा, “इंजन को फिर से चालू करने की प्रक्रिया सुगमता के साथ सम्पन्न हुई। परीक्षण सफल रहा।”
सोमनाथ के अनुसार, ‘मल्टिपल बर्न फ्यूल इंजन’ का इस्तेमाल पीएसएलवी-सी35 रॉकेट में इस्तेमाल किया जाएगा, जो दो उपग्रहों को लेकर अंतरिक्ष में जाएगा।
उन्होंने कहा कि एक उपग्रह एक थोड़ी ऊंची कक्षा में छोड़ा जाएगा और दूसरा उपग्रह थोड़ी निचली कक्षा में छोड़ा जाएगा।
तकनीकी रूप से कहा जाए तो भारत ने पहली बार किसी ‘मल्टिपल बर्न फ्यूल इंजन’ का परीक्षण किया है।
इसरो के एक अधिकारी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर आईएएनएस से कहा, “अलग-अलग कक्षाओं में बहु उपग्रह प्रक्षेपण की दिशा में पहले कदम के रूप में चौथे इंजन को पुन: चालू करने और बंद करने का परीक्षण सफल हो गया है।”
एक रॉकेट के जरिए कई उपग्रह छोड़ने का काम इसरो के लिए नया नहीं है और यह काम इसरो कई वर्षो से कर रहा है। लेकिन चुनौती एक रॉकेट के जरिए कई उपग्रहों को विभिन्न कक्षाओं में छोड़ने की है।
इसी का परीक्षण इसरो ने उस समय पूरा किया, जब पीएसएलवी ने बुधवार को सिंगापुर के छह उपग्रहों को अपने से अलग कर दिया।
पीएसएलवी रॉकेट चार इंजनों वाला रॉकेट है, जिसमें बारी-बारी से ठोस और तरल ईंधन भरे होते हैं।
अंतरिक्ष उद्योग के एक विशेषज्ञ ने आईएएनएस से कहा, “किसी रॉकेट इंजन के बंद होने के तत्काल बाद उसे चालू करना एक महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी है, जिसमें विशेषज्ञता हासिल करनी है। किसी रॉकेट का इंजन चालू होने के बाद अत्यधिक गर्मी पैदा होती है। यह प्रौद्योगिकी अंतरिक्ष में इंजन की इस गर्मी को ठंढा करने और अल्प अंतराल में ही उसे पुन: चालू करने की है।”
पीएसएलवी के चौथे इंजन को मात्र 67 मिनट की उड़ान के दौरान या इंजन के अलग होने के 50 मिनट बाद सफलतापूर्वक पुन: चालू कर दिया गया।
पुन: चालू करते समय चौथा इंजन 523.9 किलोमीटर की ऊंचाई पर था, जबकि उपग्रह 550 किलोमीटर की ऊंचाई पर रॉकेट से अलग हुआ।
इंजन के पुन: अलग होने से पहले 524 किलोमीटर की ऊंचाई पर इंजन को कुछ सेकेंड के लिए चालू किया गया।
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