ईपीएफ कर पर फैसले की घोषणा संसद में करुं गा : जेटली

नई दिल्ली, 2 मार्च (आईएएनएस)। आम बजट 2016-17 में कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) कर संबंधी घोषणा पर उपजे बवाल के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बुधवार को कहा कि इस विषय पर संसद में बहस का जवाब देते हुए वह आखिरी फैसले की घोषणा करेंगे।

आम बजट के बाद उद्योग संघ फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की), भारतीय उद्योग परिसंघ और एसोचैम के प्रतिनिधियों के साथ एक मुलाकात में जेटली ने कहा, “संसद में जब बहस होगी, तब मैं सरकार का पक्ष रखूंगा कि इस बारे में क्या फैसला किया गया है।”

इस विषय पर मंगलवार को वित्त मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि भविष्य निधि के सदस्य यदि अपनी निकासी को एन्युइटी कोश में निवेश करेंगे तो उस पर कोई कर नहीं लगाया जाएगा। यदि वे ऐसा नहीं करेंगे तो निकासी के 60 फीसदी हिस्से पर कर लगेगा।

भ्रम इस विषय पर है कि सिर्फ एक अप्रैल 2016 के बाद जमा हुए ब्याज पर कर लगेगा या इस तिथि के बाद जमा हुई पूरी राशि पर कर लगेगा। राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने पहले कहा था कि सिर्फ ब्याज के हिस्से पर कर लगेगा।

मंत्रालय के बयान में कहा गया था, “विभिन्न तबके से मिली प्रतिक्रिया में कहा गया है कि यदि निकासी के 60 फीसदी हिस्से को किसी एन्युइटी योजना में निवेश नहीं किया जाता है, तो कर सिर्फ जमा हुए ब्याज पर लगाया जाए, न कि समस्त जमा पूंजी पर।”

बयान के मुताबिक, “हमसे यह भी अनुरोध किया गया है कि ईपीएफ के तहत नियोक्ताओं के योगदान पर कोई मौद्रिक सीमा न लगाया जाए, क्योंकि राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) में भी यह नहीं है। वित्त मंत्री आने वाले समय में इस पर फैसला लेंगे।”

वेतनभोगी वर्ग सोमवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली के आम बजट पेश होने के बाद यह समझकर अचंभित और परेशान था कि ईपीएफ से की जाने वाली निकासी के 60 फीसदी कुल हिस्से पर कर लगेगा। इतना ही नहीं, यह पिछली तिथि से प्रभावित होगा।

आम बजट 2016-17 पेश करते हुए जेटली ने कहा था कि राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) से निकासी के समय कुल कोष का 40 फीसदी हिस्सा कर मुक्त रहेगा, ताकि यह बचतकर्ताओं के लिए आकर्षक बनी रहे।

जेटली ने कहा था कि कानूनी वारिस को हस्तांतरित होने वाले एन्युइटी कोष पर भी कर नहीं लगेगा।

उन्होंने कहा था कि पेंशन कोष और मान्यता प्राप्त भविष्य निधि, जिसमें ईपीएफ शामिल है, के मामले में भी एक अप्रैल (2016) को या उसके बाद किए गए योगदान से बनने वाले कोष के मामले में कोष के 40 फीसदी हिस्से के कर मुक्त रहने का नियम ही लागू होगा।

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