नई दिल्ली, 4 अगस्त (आईएएनएस)। ई-कॉमर्स उद्योग के लिए अलग से कानून बनाने का सरकार के पास कोई प्रस्ताव नहीं है। यह बात मंगलवार को उपभोक्ता मामलों के मंत्री राम विलास पासवान ने कही।
पासवान ने कहा कि प्रतिस्पर्धा आयोग ने कुछ ई-कॉमर्स कंपनियों पर लगाए जा रहे अनुचित प्रतिस्पर्धात्मक लाभ के आरोप को आधारहीन पाया।
पासवान ने कहा, “ई-कॉमर्स उद्योग के लिए अलग कानून या नियमन का कोई प्रस्ताव नहीं है।”
मंत्रालय के मुताबिक, “ई-कॉमर्स की साल-दर-साल वृद्धि दर का कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। 2014-15 के ताजा तरीन आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक अगले पांच साल में ई-कॉमर्स बाजार का 50 फीसदी से अधिक विस्तार होगा।”
पारंपरिक रिटेलरों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठनों जैसे कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) और रिटेलर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आरएआई) ने हालांकि ई-कॉमर्स में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) से संबंधित दिशानिर्देश पर स्पष्टीकरण मांगा है।
एफडीआई नीति वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग करता है।
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