उच्च न्यायालय ने उप्र सरकार पर लगाया दो लाख रुपये का हर्जाना

न्यायालय ने याची को एक माह में यह राशि भुगतान करने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने राज्य सरकार को छूट दी है कि वह हर्जाना राशि दोषी अधिकारियों से वसूल सकती है। न्यायालय ने जमीन के बैनामे में स्टांप शुल्क की कमी की वसूली के तहत याची से ली गई धनराशि भी आठ फीसदी ब्याज के साथ वापस करने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने गोरखपुर में स्टांप डिपार्टमेंट के डिप्टी कमिश्नर के 25 जनवरी साल 2013 के आदेश को भी रद्द कर दिया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति एस.पी. केसरवानी ने देवरिया की जानकी देवी की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। न्यायालय ने आदेश का पालन करने के लिए महानिबंधक को आदेश दिया है कि वह आदेश की प्रति मुख्य सचिव को भी भेजें।

याची ने 2013 में जमीन खरीदी थी, जिसमें एक कमरा बनाया और शेष जमीन पर कृषि हो रही है। उपनिबंधक देवरिया की रिपोर्ट पर एडीएम वित्त एवं राजस्व देवरिया ने बकाया स्टांप शुल्क, अर्थदंड व ब्याज सहित 50230 रुपये की मांग की, जिसके खिलाफ पुनरीक्षण खारिज हो गया। मामला जब उच्च न्यायालय आया तो डीएम को पुनर्विचार करने को कहा गया, जिस पर डीएम ने स्टांप शुल्क व अर्थदंड बढ़ा दिया।

बाद में पाया गया कि डीएम का आदेश तहसीलदार व नायब तहसीलदार की गलत निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर पारित हुआ था।

उच्च न्यायालय का कहना है कि अधिकारियों ने ग्यारह वर्ष तक गलत तरीके से याची को मुकदमेबाजी में उलझाए रखा, इसलिए इस मामले में भारी हर्जाना लगाया जाना चाहिए। अदालत ने इस मामले में उप्र सरकार पर दो लाख रुपये का हर्जाना लगाया।

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