नई दिल्ली, 31 मार्च (आईएएनएस)। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने गुरुवार को कहा कि उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाना और हरीश रावत सरकार को बर्खास्त करना लोकतंत्र पर खुल्लमखुल्ला हमला है।
माकपा के मुखपत्र ‘पीपुल्स डेमोक्रेसी’ के संपादकीय में कहा गया है, “अरुणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने के बाद नरेंद्र मोदी सरकार ने यह दिखा दिया है कि वह किसी भी उपलब्ध मौके का इस्तेमाल कर गैर भाजपाई राज्य सरकार को गिरा देगी।”
माकपा ने कहा है कि संविधान का अनुच्छेद 356 केंद्र सरकार के हाथ में ऐसा हथियार है, जिसका इस्तेमाल कर वह किसी भी निर्वाचित सरकार को मनमाने ढंग से गिरा सके और केंद्र में सत्तारूढ़ दल के राजनीतिक हितों को सुगम बना सके।
संपादकीय में कहा गया है कि अनुच्छेद 356 स्पष्ट तौर पर एक गैरलोकतांत्रिक एवं सत्तावादी प्रावधान है। इसमें केवल राज्यपाल की एक ऐसी रिपोर्ट की जरूरत होती है जिसमें कहा गया हो कि राज्य में संवैधानिक तंत्र ध्वस्त हो गया है।
संपादकीय में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने ऐसी रिपोर्ट पाने और उस पर कार्रवाई के लिए आसानी से वश में किए जा सकने वाले राज्यपालों को नियुक्त किया है और इनका इस्तेमाल किया है।
माकपा ने संविधान के अनुच्छेद 356 को खत्म करने और उसकी जगह कोई ऐसा प्रावधान करने करने की मांग की है जिसमें केंद्र सरकार को मनमानी करने की आजादी नहीं हो।
माकपा ने उल्लेख किया है कि उत्तराखंड में जिस दिन मुख्यमंत्री को सदन में अपना बहुमत साबित करना था उसके एक दिन पहले वहां राष्ट्रपति शासन लगाया गया।
कांग्रेस के नौ बागी विधायकों को विधानसभा अध्यक्ष ने दलबदल कानून के तहत अयोग्य करार दे दिया था।
संपादकीय में कहा गया है कि जब यह स्पष्ट हो गया कि विधायकों को अयोग्य करार देने के बाद मुख्यमंत्री सदन में बहुमत हासिल कर लेंगे तो केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जल्दबाजी में सदन में होने वाले शक्ति परीक्षण के एक दिन पहले राष्ट्रपति शासन लगाने की संस्तुति कर दी।
dharmpath.com dharmpath