एसपी डॉ. संजीव शुक्ला ने बताया कि दास दंपति को उदयन ने जब दफनाया, तब क्या उनमें से किसी की सांस चल रही थी? इस रहस्य से पर्दा उठाने डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल के फोरेंसिक लैब में मंगलवार को एक्सपर्ट्स ने 100 डिग्री सेल्सियस पर कब्र से मिली हड्डियों को उबाला।
एक्सपर्ट्स के अनुसार, कब्र से निकले हड्डियों में मांस का अवशेष नहीं है। हड्डियां साफ कर चोट के निशान ढूंढने के लिए सूक्ष्म परीक्षण किया जा रहा है। साथ ही दोनों कंकाल के दांत और बाल डीएनए टेस्ट के लिए निकाले गए हैं। आरोपी उदयन दास का सैंपल लेना बाकी है। फिर कंकाल और उसके डीएनए का मिलान किया जाएगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आते ही रायपुर पुलिस रिपोर्ट का खुलासा करेगी।
उल्लेखनीय है कि उदयन ने रायपुर पुलिस को बताया था कि उसने मां इंद्राणी का मुंह आलमारी में कपड़ा रखते वक्त दबाया था। तब उनकी सांस चल रही थी। आधे घंटे बाद पिता बीके दास की हत्या की। लाशों को दफनाने से पहले सिर को बोरे और कपड़े से बांध दिया था ताकि सांस चल भी रही हो तो बंद हो जाए।
शुक्ला ने कहा, “फोरेंसिक जांच से कई राज खुलेंगे। यह पता चलेगा कि किसी वजनी चीज से हमला कर मौत के घाट तो नहीं उतारा गया। हड्डियां कितनी पुरानी है, लाशों को कितने साल पहले दफनाया गया। दास दंपति में पहले किसकी मौत हुई महिला की या पुरुष की। सबसे पर्दा उठ जाएगा।”
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