केंद्र सरकार इस वक्त 10 तरह के उपकर लगाती है, जिसके तहत कुल वसूली 2016-17 में 1.65 लाख करोड़ रुपये (25.3 अरब डॉलर) होने का अनुमान है।
केंद्र सरकार इस वक्त 10 तरह के उपकर लगाती है, जिसके तहत कुल वसूली 2016-17 में 1.65 लाख करोड़ रुपये (25.3 अरब डॉलर) होने का अनुमान है।
यह वसूली 2015-16 के मुकाबले 22 फीसदी अधिक और 2014-15 की 83,000 करोड़ रुपये (12.7 अरब डॉलर) वसूली से लगभग दोगुनी है।
देश के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक ने कहा है कि उपकर वसूली के एक बड़े हिस्से का उपयोग नहीं हो पा रहा है।
केंद्र सरकार स्वच्छता, शिक्षा, पर्यावरण, कृषि, अवसंरचना, शौचालय और सड़क जैसे मदों के नाम पर उपकर लगाती है।
सड़क, शौचालय जैसे कार्यो के लिए लिए जाने वाले उपकरों का जहां अपेक्षाकृत बेहतर उपयोग हो रहा है, वहीं माध्यमिक शिक्षा, दूरसंचार और अनुसंधान एवं विकास जैसे कार्यो के लिए उपकरों से हो रही वसूली का समुचित उपयोग नहीं हो रहा है।
2015-16 में सड़क उपकर से 73,000 करोड़ रुपये (11.2 अरब डॉलर) की वसूली हुई, जो 2014-15 की 25,121 करोड़ रुपये के मुकाबले 190 फीसदी अधिक है। 2016-17 में हालांकि इस मद में कुल वसूली मामूली बढ़त के साथ 78,000 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।
प्रारंभिक शिक्षा के लिए उपकर से हुई 90 फीसदी वसूली प्रारंभिक शिक्षा कोष में स्थानांतरित की गई है। 2004-05 से 2014-15 के बीच इस मद में कुल 1.54 लाख करोड़ की वसूली हुई और इसमें से 1.4 लाख करोड़ रुपये का उपयोग प्रारंभिक शिक्षा के वित्त पोषण के लिए किया गया।
स्वच्छ भारत कोष नवंबर 2015 से लगाया जा रहा है। इसका मकसद देश भर में शौचालय बनवाना है। सरकार के मुताबिक गत दो साल में 1.6 करोड़ शौचालय बने हैं। अगले तीन साल में 2019 तक देश को खुले में शौच से मुक्त करने का लक्ष्य हासिल करने के लिए 9.5 करोड़ अतिरिक्त शौचालय बनाए जाने चाहिए।
मार्च 2015 से फरवरी 2016 तक एक करोड़ शौचालय बने, जो 2014-15 के मुकाबले 58 लाख अधिक हैं।
स्वच्छ पर्यावरण उपकर क ेरूप में 2010-11 से अब तक 28 हजार करोड़ रुपये की वसूली हुई, लेकिन आधी से भी कम राशि राष्ट्रीय स्वच्छ ऊर्जा कोष में अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए स्थानांतरित की गई।
ग्रामीण क्षेत्रों में संचार सेवाओं का प्रसार करने के लिए 2002-03 से 2014-15 के बीच उपकर से कुल 66 हजार करोड़ रुपये की वसूली हुई, जिसमें से सिर्फ 39 हजार करोड़ रुपये का ही उपयोग हुआ है।
माध्यमिक और उच्च शिक्षा उपकर से 2014-15 तक गत एक दशक में 64 हजार करोड़ रुपये की वसूली हुई, लेकिन इससे किसी भी विशेष कोष का निर्माण नहीं हुआ और यह स्पष्ट नहीं है कि इस राशि का कैसे उपयोग किया गया।
सीएजी उपकर से होने वाली वसूली में अनियमितता की ओर इशारा करती है।
सीएजी के मुताबिक गत दो दशकों में चार तरह के उपकरों से होने वाली 3.1 लाख करोड़ रुपये की वसूली के अधिकतम 41 फीसदी का ही उपयोग हुआ।
1996-97 से 2014-15 के बीच अनुसंधान और विकास उपकर से 5,700 करोड़ रुपये की वसूली हुई, जबकि इसमें से 1,228 करोड़ रुपये का ही उपयोग हो पाया।
उल्लेखनीय है कि अप्रत्यक्ष कर अमीर और गरीब दोनों पर समान रूप से लगते हैं। इसके कारण उन्हें भी कर देना होता है, जिसके लिए उपकर वसूले जा रहे हैं।
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