नई दिल्ली, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। उपनिषदों की विख्यात विदुषी प्रो. वेदवती वैदिक का यहां गुरुवार को निधन हो गया। अस्वस्थ विदुषी का दिल्ली के लिवर-इंस्टीट्यूट में उपचार चल रहा था। वह 70 वर्ष की थीं। वेदवती प्रसिद्ध पत्रकार डॉ. वेदप्रताप वैदिक की पत्नी थीं।
प्रो. वेदवती का अंतिम संस्कार लोदी इस्टेट के दयानंद घाट पर किया गया।
वह वर्ष 1977 से ही दिल्ली विश्वविद्यालय के मैत्रेयी महाविद्यालय में अध्यापन और श्री अरविंद महाविद्यालय (सांध्य) में संस्कृत की विभागाध्यक्ष रही हैं। प्रो. वेदवती ने 1986 से दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिण परिसर में एम.ए. और एम.फिल. कक्षाओं में प्राध्यापन एवं शोध निर्देशन किया।
वह ‘इंडियन कौंसिल ऑफ हिस्टोरिकल रिसर्च’ की सीनियर फेलो (1980-83) रही हैं। वर्ष 2013 में वह सेवानिवृत्त हुई थीं। उन्होंने साउथ एक्सटेंशन, दिल्ली के ‘रामेश्वरदास गुप्त धर्मार्थ ट्रस्ट’ के प्रबंध न्यासी के तौर पर समाज-सेवा के कई अभियान चलाए हैं।
उपनिषद्-विद्या और वेदवती वैदिक एक-दूसरे के पर्याय बन गए हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से संस्कृत में बी.ए.(ऑनर्स) और एम.ए. करने के बाद उन्होंने ‘श्वेताश्वतर उपनिषद के भाष्यों का एक अध्ययन’ विषय पर 1977 में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।
उपनिषद् विद्या पर उनके ये ग्रंथ प्रकाशित हुए हैं- ‘श्वेताश्वतर उपनिषद्: दार्शनिक अध्ययन’, ‘उपनिषदों के ऋषि’, ‘उपनिषद् वांगमय: विविध आयाम’, ‘उपनिषदों के निर्वचन’ और ‘उपनिषद्युगीन संस्कृति’। उन्होंने भगवद्गीता का हिंदी और अंग्रेजी में अनुवाद किया है। उनका 1500 पृष्ठों का उपनिषद् महाकोश (एनसाइक्लोपीडिया ऑफ उपनिषद्स) हिंदी और अंग्रेजी में शीघ्र प्रकाश्य हैं।
उन्होंने अमेरिका, चीन, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, आस्ट्रिया, चेकोस्लोवाकिया, त्रिनिदाद, कजाकिस्तान, थाईलैंड, सिंगापुर, मॉरीशस, भूटान, अफगानिस्तान, ईरान, इराक, तुर्की, लेबनान, ताइवान, नेपाल आदि देशों की यात्राएं की थीं।
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