न्यायाधीश विक्रम नाथ और न्यायाधीश अब्दुल मोईन की पीठ ने यह आदेश याचिकाकर्ता की अधिवक्ता नूतन ठाकुर तथा आयोग की अधिवक्ता अपराजिता बंसल को सुनने के बाद दिया।
नूतन ने न्यायालय को बताया, “उत्तर प्रदेश निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आदर्श आचार संहिता के प्रस्तर 3 (च) में कहा गया है कि वोटिंग समाप्त होने के 48 घंटे पूर्व किसी जनसभा का आयोजन नहीं होगा और न ही किसी भी टीवी, इलेक्ट्रॉनिक तथा प्रिंट मीडिया में चुनाव प्रचार संबंधी कोई विज्ञापन प्रकाशित होगा। इसके विपरीत चुनाव के दिन तक प्रत्याशियों तथा राजनैतिक दलों द्वारा प्रचार में विज्ञापन प्रकाशित कराए गए हैं, जो आचार संहिता का उल्लंघन है। लेकिन आयोग को सूचित करने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं हुई।”
इस पर अधिवक्ता बंसल ने कहा कि आयोग पूर्व से बुकिंग कराए गए विज्ञापन की गिनती नहीं करता है। आयोग के तर्को से असहमत होते हुए न्यायालय ने उसे तीन सप्ताह में चंद्रा द्वारा प्रस्तुत सभी शिकायतों का निस्तारण करने के आदेश देते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया।
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