मुद्दा आरक्षण विधेयक का हो या बसपा मुखिया मायावती पर की गई अभद्र टिप्पणी का, इन सभी मुद्दों पर आरक्षण समर्थकों ने मोदी सरकार को कोसा और एक सुर में मोदी सरकार के खिलाफ हल्ला बोल का ऐलान करते हुए सबक सिखाने का ऐलान किया।
महापंचायत को संबोधित करते हुए आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक अवधेश कुमार वर्मा समेत अन्य वक्ताओं ने कहा कि भाजपा सरकार के इशारे पर दलितों की प्रेरणास्रोत मायावती के खिलाफ भाजपा नेता दयाशंकर सिंह द्वारा अमर्यादित टिप्पणी की गई, जिससे पूरे देश के दलित समाज में काफी आक्रोश व्याप्त है।
संयोजक वर्मा ने कहा कि प्रदेश की सपा सरकार राजनीति बंद कर भाजपा नेता दयाशंकर सिंह की गिरफ्तारी कराए।
दलित महापंचायत में 7 प्रस्ताव रखे गए, जिसको महापंचायत में उपस्थित सभी ने ध्वनिमत से पारित किया। ये प्रस्ताव हैं-
1. लोकसभा में लंबित 117वां पदोन्नति में आरक्षण संवैधानिक संशोधन बिल चल रहे वर्तमान मानसून सत्र में पास कराया जाए।
2. उप्र में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की आड़ में गलत तरीके से पदों व वरिष्ठता में रिवर्ट किए गए लाखों कर्मिकों को पुनस्र्थापित कराया जाए।
3. केंद्र की मोदी सरकार बनने के बाद दलितों पर देश में लगातार हो रहे अत्याचारों पर अविलंब अंकुश लगाया जाए।
4. गुजरात के उना की घटना व मुंबई में बाबा साहब के संग्रहालय को गिराए जाने की घटना पर प्रधानमंत्री मूकदर्शक बनने के बजाय अविलंब हस्तक्षेप कर दलितों को न्याय दिलाएं।
5. पिछड़े वर्ग के कर्मिकों को पूर्व की भांति पदोन्नतियों में आरक्षण की व्यवस्था बहाल की जाए।
6. दयाशंकर सिंह की अविलंब गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए।
7. प्रदेश के हर जिले में संघर्ष जारी रहेगा, उप्र में आरक्षण समर्थक सरकार बनाने का संकल्प लें।
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