लखनऊ, 12 अप्रैल (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव आलोक रंजन के सेवा विस्तार के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नूतन ठाकुर द्वारा दायर याचिका पर मंगलवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से बुधवार तक जवाब मांगा है।
न्यायमूर्ति ए.पी. साही और न्यायमूर्ति ए.आर. मसूदी की दो सदस्यीय पीठ ने यह आदेश केंद्र सरकार के अधिवक्ता सूर्यभान पांडेय, प्रदेश के महाधिवक्ता विजय बहादुर सिंह और याची के अधिवक्ता अशोक पांडेय को सुनने के बाद किया।
न्यायालय ने इस मामले में बुधवार (13 अप्रैल) को सुनवाई की अगली तारीख तय की है।
न्यायालय ने दोनों प्रतिवादी से मुख्यमंत्री द्वारा भेजी गई संस्तुति, केंद्र सरकार द्वारा लिए गए निर्णय और राज्य सरकार द्वारा इस संबंध में पारित आदेश को हलफनामे पर प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं।
गौरतलब है कि पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार को केंद्र को भेजे जाने वाले प्रारूप को अगली सुनवाई तक प्रस्तुत करने को कहा था, जो अभी तक उपलब्ध नहीं कराया गया है।
नूतन ने अपनी याचिका में कहा था कि रंजन के खिलाफ सीबीआई द्वारा कई मुकदमे दर्ज किए गए थे, जिनमें एक मामला अभी तक दिल्ली उच्च न्यायालय में लंबित है, इसलिए उनका सेवा-विस्तार गलत था।
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