इस अवसर पर पाण्डेय ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अधिक से अधिक जनोपयोगी सुविधाओं को ई-सुविधा केन्द्रों के माध्यम से उपलब्ध कराने की प्राथमिकता के मद्देनजर प्रदेश के 34 जिलों में ई-सुविधा केन्द्रों की स्थापना के लिए यह कदम उठाया गया है।
उन्होंने कहा कि अभी तक ई-सुविधा परियोजना प्रदेश के 17 जिलों में लागू है। इन जिलों में 135 ई-सुविधा केन्द्र संचालित हैं, जहां प्रतिमाह लगभग 6.50 लाख से 6.80 लाख उपभोक्ता ई-सुविधाएं प्राप्त कर रहे हैं और प्रतिमाह लगभग 250 करोड़ से 280 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है।
पाण्डेय ने ई-सुविधा के तहत और अधिक सेवाएं शामिल करने, पूरी पारदर्शिता बरतने तथा दी जा रहीं सुविधाओं की डिलीवरी को बेहतर बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र, खासकर दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों को इस परियोजना का लाभ देने के लिए मोबाइल ई-सुविधा का संचालन किया जाए। उन्होंने ई-सुविधाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार करने की जरूरत पर जोर दिया, ताकि आमजन इसके फायदों से अवगत हो सकें और इसे अपना सकें।
प्रमुख सचिव, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी संजीव सरन ने कहा कि ई-सुविधा केन्द्रों द्वारा उपलब्ध कराई जा रहीं सेवाओं की संख्या बढ़ाने का प्रयास करने के साथ ही इस परियोजना का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ई-सुविधा को सर्वसुलभ बनाने के लिए वेब-आधारित तथा मोबाइल एप आधारित सेवाएं शुरू किया जाना प्रस्तावित है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की मुफ्त स्मार्ट फोन योजना भी न केवल सरकार की योजनाओं के प्रचार-प्रसार में, बल्कि ई-सुविधाओं की उपलब्धता को सुगम बनाने में भी सहायक होगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा सभी शहरों और गांवों को स्मार्ट किए जाने की योजना है।
इस अवसर पर विशेष सचिव, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आई.टी., अजयदीप सिंह के अलावा अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद थे।
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