लखनऊ, 11 मार्च (आईएएनएस)। शराब कारोबारी विजय माल्या बैंकों के 9 हजार करोड़ रुपये लेकर भारत से फरार हो चुके हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में भी कई बड़े समूह हैं, जिनके मालिक गन्ना किसानों का हजारों करोड़ रुपये लेकर बैठे हुए हैं। किसानों का करोड़ों रुपया दबाने वाली 25 चीनी मिल बंद हो चुकी हैं और 15 ने विभाग को बंदी का नोटिस थमा दिया है, जिसके बाद किसान अपने आपको असहाय महसूस कर रहा है।
विभाग के सूत्रों के मुताबिक, उप्र में चीनी मिल मालिकों पर करीब तीन हजार करोड़ रुपये बकाया है। प्रदेश में 25 चीनी मिलें बंद हो चुकी हैं, वहीं 15 ने बंदी का नोटिस भेज दिया है। मिलों का कहना है कि क्षेत्र में गन्ना समाप्त हो गया है, ऐसे में पेराई कैसे की जा सकती है।
नियमानुसार, बंदी से पहले मिलों को बकाया भुगतान की सूची विभाग को सौंपनी होती है, लेकिन इसको पूरी तरह दरकिनार किया गया है। जबकि इन चीनी मिलों पर करोड़ों रुपया बकाया है। इन मिलों पर प्रदेश की 3532 करोड़ रुपये बकाया है।
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के अध्यक्ष वीएम सिंह का आरोप है कि ये सब सरकार की मिलीभगत का ही नतीजा है।
उन्होंने कहा, “सरकार को ये बड़े ग्रुप ही चला रहे हैं। अब ऐसे में भला सरकार इनके खिलाफ क्या कार्रवाई कर सकती है। अब इन मिलों ने अपने सीजनल स्टाफ को भी पेडऑफ करना शुरू कर दिया है, लेकिन बकाया चुकाने के मामले में कितना पेमेंट कब तक देंगे, इसकी जानकारी गन्ना विभाग को नहीं दी गई है।”
गन्ना विभाग के एक अधिकारी ने हालांकि बताया कि प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर बकाया वसूली के लिए दबाव बनाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही मिलों द्वारा हफ्तेभर में पूरी जानकारी मुख्यालय भेजने के लिए कहा है, ताकि किसानों समय से उनका भुगतान किया जा सके।
गन्ना किसानो के बकाये को लेकर आंदोलन चलाने वाले राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के प्रदेश अध्यक्ष मुन्ना सिंह चौहान ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि यह दुर्भाग्य है कि विजय माल्या जैसे उद्योगपति 9000 करोड़ रुपये लेकर फरार हो गए, लेकिन यहां पर शुगर मिलें चलाने वाली बड़ी कंपनियां किसानों का लगभग 3000 करोड़ रुपये दबाकर बैठी हुई हैं। इन बड़ी कंपनियों के मालिकों पर सरकार क्यों नहीं हाथ डाल रही है।
उल्लेखनीय है कि पिछले पेराई सत्र के बड़े बकायेदारों में कई नामी कंपनियां शामिल हैं। मोदी ग्रुप पर 134 करोड़ रुपये का बकाया है, जबकि मवाना ग्रुप पर 163 करोड़ रुपये बकाया है। राणा ग्रुप पर 24 करोड़ रुपये का कर्ज है। बजाज ग्रुप पर 13 करोड़ रुपये का बकाया है। इसके अलावा कई अन्य मिलें हैं, जिन पर गन्ना किसानों का बकाया है।
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