नई दिल्ली, 11 मार्च (आईएएनएस)। इशरत जहां मुठभेड़ मामले में संलिप्त पुलिस अधिकारियों पर से आपराधिक मुकदमा हटाने वाली जनहित याचिका को सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को खारिज कर दिया।
याचिका में आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के सदस्य रह चुके डेविड हेडली के बयानों के आधार पर अदालत से गुजरात के पुलिसकर्मियों पर से मामले को हटाने की मांग की गई थी। बयान में हेडली ने कहा था कि इशरत पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर की सदस्य थी।
इस आशय की जनहित याचिका एम.एल. शर्मा ने शीर्ष अदालत में दायर की थी। न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष और न्यायमूर्ति अमिताव रॉय की द्विसदस्यीय पीठ ने याचिकाकर्तासे कहा कि उन्हें इस मामले में संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय में जाना चाहिए। शीर्ष अदालत संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत कोई भी आदेश नहीं दे सकती है।
सर्वोच्च न्यायालय की पीठ के समक्ष शर्मा ने कहा कि पुलिसकर्मी जून, 2004 को इशरत जहां और अन्य तीन आतंकवादियों को खत्म कर अपने कत्र्तव्य का पालन कर रहे थे।
उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि कैसे कट्टर आतंकवादियों की हत्या के लिए पुलिस कर्मियों को फंसाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों को इसलिए निलंबित किया गया क्योंकि ‘पुलिस कार्रवाई में मारे गए एक समुदाय विशेष के थे।’
शर्मा ने पीठ के समक्ष दलील देते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत मूल अधिकार को लागू कराने के लिए लोग सर्वोच्च अदालत में जा सकते हैं। जबकि, अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय मूल अधिकार को लागू करने के अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए भी आदेश दे सकता है।
याचिकाकर्ता ने आपराधिक मामला समाप्त करने के अलावा मुठभेड़ को फर्जी बता कर आरोपित गुजरात के पुलिसकर्मियों पर अभियोग चलाने के लिए उन्हें क्षतिपूर्ति देने की भी मांग की थी।
15 जून 2004 को कथित रूप से फर्जी मुठभेड़ में मुंबई की छात्रा इशरत जहां और उसके तीन कथित सहयोगी प्रणेश गोपीनाथ पिल्लै, अमजद अली और जिशान जौहर मारे गए थे।
गुजरात पुलिस ने कहा था कि ये सभी पाकिस्तान के नियंत्रण में थे और जम्मू और कश्मीर के रास्ते गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या करने आए थे।
पीठ में याचिका खारिज होने के बाद इसे वापस लेने से संबंधित शर्मा की दलील को भी अदालत ने ठुकरा दिया। पीठ ने कहा कि उसे जो कहना था, वह कह दिया।
लेकिन, शीर्ष अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया कि हाल में हेडली के खुलासे के आलोक में जो लोग राहत पाने की उम्मीद रखते हैं, उनके मार्ग में शर्मा की खरिज याचिका आड़े नहीं आएगी। अदालत ने यह बात गुजरात सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता तुषार मेहता की दलील पर कही।
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