बताया गया कि 19 सितंबर, 2015 को थाना बालाबेहट के ग्राम मुड़ारी निवासी गनेश सहरिया की 12 वर्षीय पुत्री राधिका अचानक लापता हो गई थी, पिता गनेश सहरिया की शिकायत पर पुलिस ने 21 सितंबर को धारा 363 के तहत मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी थी, लेकिन उसका पता नहीं चल रहा था।
पुलिस अधीक्षक मो. इमरान ने लापता बालिका की खोजबीन के निर्देश दिए थे, जिसके बाद से थानाध्यक्ष बालाबेहट मुकेश कुमार वर्मा बालिका को ढूंढने में जुट गए थे। उन्होंने चाइल्ड हेल्पलाइन के सहयोग से बालिका को खोज निकाला।
पता चला कि बालिका पश्चिम बंगाल के मेटनीपुर में है, जिसके बाद बाल कल्याण समिति के सहयोग से पुलिस ने गुड़िया राधा को खोज निकाला। अब राधा को ललितपुर लाया गया और उसके माता-पिता को सौंप दिया।
माता-पिता के मिलते ही राधा खुशी के मारे रो पड़ी, वहीं उनका भी खुशी का ठिकाना नहीं रहा, इधर बताया गया कि किसी बात से नाराज होकर राधा घर से भाग निकली और बीना रेलवे स्टेशन पहुंची, जहां उसे एक ट्रेन मिल गई। वह ट्रेन में सवार हो गई और नींद लग गई, जब वह उठी तो उसने देखा कि पश्चिम बंगाल पहुंच गई है।
वह रेलवे स्टेशन पर रो रही थी तो पुलिसकर्मी मिले, लेकिन उसकी और वहां की भाषा में वह नहीं बता पाई, इसके बाद पश्चिम बंगाल की पुलिस द्वारा उसे चाइल्ड हेल्पलाइन के सुपुर्द कर दिया गया था और उसकी तलाश जारी थी।
इधर ललितपुर पुलिस द्वारा भी राधा की फोटो आदि वेबसाइटों, फेसबुक व्हाटसएप पर डाली गई थी, जिसके बाद राधा मिल सकी।
चाइल्ड हेल्पलाइन की टीम माखनलाल दत्ता टीम, महिला कांस्टेबल अदिति बेरा, सीमा राना एवं एएसआई कमल ब्रह्म पूर्वी मिदनापुर (पश्चिम बंगाल) द्वारा बालिका राधिका को ललितपुर लाया गया, जिसे बाल कल्याण समिति के न्यायपीठ के प्रभारी अध्यक्ष राजेंद्र कुमार रजक, सदस्य दिनेश कुमार गोस्वामी, अजय बरया, कल्पना संज्ञा के समक्ष पेश किया गया। इसके बाद बालिका को उसके माता-पिता के सुपुर्द कर दिया गया।
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