उन्होंने कहा कि तोताराम पर लगे आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और ऐसे मामले में एक माह से 10 साल तक की सजा है, जिनमें तमाम गैरजमानी अपराध शामिल हैं। तोताराम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था, पर कोर्ट ने 5 नवंबर, 2015 के अपने आदेश ने उनकी याचिका खारिज कर मात्र यह कहा था कि यदि वह तीन सप्ताह में कोर्ट में हाजिर होते हैं तो कोर्ट उनकी जमानत याचिका पर उसी दिन सुनवाई करे।
नूतन ने कहा कि तोताराम अच्छी तरह जानते थे कि सत्र न्यायालय उन्हें जमानत नहीं देगी। इसलिए उन्होंने हाईकोर्ट के आदेशों का सीधा उल्लंघन किया और यह शॉर्टकट तरीका अपनाया, जिसमें यूपी पुलिस ने भी उनकी भारी मदद की।
इसे कानून का खुला मजाक बताते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री से उच्चस्तरीय जांच कराने और तोताराम को तत्काल गिरफ्तार कराकर संबंधित कोर्ट में पेश किए जाने का अनुरोध किया है।
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