इससे पहले सीएमएस, कानपुर रोड शाखा के कैम्पस में आयोजित सम्मेलन में विचार-विमर्श की अध्यक्षता फिलीपीन्स सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति हिलेरियो डेविड जूनियर ने की।
प्लेनरी सेशन में न्यायमूर्ति हिलेरियो ने कहा कि आज सबसे जरूरी है कि हम संयुक्त राष्ट्र में सुधार लाएं। वीटो पावर की वजह से यह व्यवस्था लोकतांत्रिक नहीं रह गई है।
वहीं, जाम्बिया के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुरी इरेन सी. मम्बिलीना ने कहा, “हमारे बच्चे व युवा जैसे होंगे, वैसा ही हमारा भविष्य होगा। महात्मा गांधी ने एक अच्छे जीवन के लिए सात पापों से बचने की शिक्षा दी थी, जिनमें से एक सिद्धांतविहीन राजनीति भी थी। आज कानून को इतना सबल व शक्तिशाली बनाना होगा कि इसमें राजनीतिकरण न हो सके।”
कम्बोडिया के न्याय मंत्रालय के सेक्रेट्री ऑफ स्टेट सूदवी चान का कहना था कि कानून के राज की स्थापना की जानी चाहिए, तभी बाल अधिकारों व महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा होगी। हम सभी लोग ऐसा समाज चाहते हैं, जिसमें न्याय, समानता व शांति हो।
सूडान के मुख्य न्यायाधीश डॉ. हैदर अहमद डफोला ने कहा कि इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस के निर्णय विश्व के सभी राष्ट्रों पर समान रूप से लागू होने चाहिए खास तौर पर रंगभेद, परमाणु बमों के उपयोग व जमावड़े तथा आतंकवाद आदि जैसे मानवता के विरुद्ध अपराधों में।
अर्जेटीना के नेशनल जज एंड एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर जेवियर एच. फर्नाडिज ने अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के सिद्धांत के प्रति अर्जेटीना का समर्थन दोहराते हुए कहा कि सभी बच्चे समान हैं और उन्हें समान अधिकार प्राप्त होने चाहिए।
बेनिन के सर्वोच्च न्यायालय के अध्यक्ष ओस्माने बाटोको का कहना था कि आतंकवाद और जातीय झगड़े बंद होने चाहिए। किसी भी देश के प्रत्येक नागरिक को दूसरे नागरिकों के समान स्वयं को समझने का पूरा अधिकार है, जबकि कैमरून के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डेनियल मेकोबे सोने ने कहा कि विश्व में न्यायपूर्ण एवं सम्मानित व्यवस्था लागू करने के लिए एक नए राजनीतिक तंत्र की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण के प्रति भी सरकारों को गंभीरता से विचार करना होगा।
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