उप्र : पीने के पानी के लिए बांदा में किसान अनशन पर

बांदा जिला मुख्यालय सहित आस-पास के आधा सैकड़ा गांवों में पिछले एक सप्ताह से भीषण पेयजल संकट छाया हुआ है। कथित रूप से केन नदी में किए गए बालू के अवैध खनन की वजह से नदी भी लगभग सूख गई है। प्रशासन ने संगीनों के साये में मशीनों से नदी की खुदाई भी करवाई है, लेकिन अभी जल संस्थान के इंटेकवेल तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाया है। लिहाजा शहर और आस-पास के कई गांवों के वशिन्दे बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं।

अपनी पूर्व योजना के अनुसार बुंदेलखंड किसान यूनियन के केंद्रीय अध्यक्ष विमल कुमार शर्मा ने कई किसानों के साथ जिला मुख्यालय के अशोक लॉट तिराहे पर अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया है। विमल कुमार ने कहा, “बालू के अवैध खननकर्ताओं के साथ प्रशासन की मिलीभगत है और यही वजह है कि शहर सहित गांवों के लोग पीने के पानी को तरस रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “नदी में बालू का इतना खनन न होता तो अन्य सालों की भांति इस साल भी पानी की इतनी किल्लत न होती।”

अपर जिलाधिकारी सन्तोष बहादुर सिंह ने कहा, “काफी हद तक केन नदी की जलधारा साफ हो गई है, और दो-चार दिन में सभी लोगों को पीने का पानी उपलब्ध करा दिया जाएगा।”

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