बांदा, 8 जुलाई (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश में बांदा जिले की बिसंडा ब्लॉक की ग्राम पंचायत सिंहपुरमाफी के ग्राम सचिवालय में गांव के प्रधान ने भूसा और कंडे भरवा दिए हैं। ग्रमीणों की शिकायतों को अधिकारी अनसुना कर चुके हैं। अब इस मुद्दे को लेकर गांव में गांवदारी बनने के आसार बन गए हैं।
करीब दस साल पहले पंद्रह लाख रुपये की लागत से गांव में ग्राम सचिवालय का निर्माण हुआ था, जिसमें ग्राम प्रधान, ग्राम सचिव, पुस्तकालय आदि के लिए कई कमरे बने हुए हैं। लेकिन अब तक इस पंचायत भवन का कोई भी पदाधिकारी ग्रामीणों का दुख-दर्द सुनने के लिए हाजिर नहीं हुआ।
सच तो यह है कि ग्राम प्रधान अपने घर से ही सचिवालय चला रही हैं, तो सचिव ब्लॉक मुख्यालय में बैठकर पंचायत के कार्य निपटाता है। जबकि शासन की मंशा है कि पंचायत में तैनात सभी कर्मी ग्राम सचिवालय में ही मौजूद होकर अपने कार्यों का संपादन करेंगे।
सचिवालय की दीवार पर टंगे बोर्ड में दिनवार अधिकारी के मौजूद रहने की सूची बाकायदे चस्पा है। ग्राम सचिवालय में ग्राम प्रधान ने अपने लिए आरक्षित कमरे में भूसा भरवा दिया और सचिव वाले कमरे में कंडे रखवा दिए हैं। इतना ही नहीं, पुस्तकालय को पशुबाड़ा बना दिया गया है।
गांव के देवनाथ ने बताया कि जिलाधिकारी तक से इसकी शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अनसुना कर दिया गया है। रखरखाव के अभाव में शाम ढलते ही यह सचिवालय बिगड़ैल युवकों के लिए ‘मिलन केंद्र’ बन जाता है। उन्होंने बताया कि ग्राम प्रधान गांव सभा की खुली बैठक तक अपने निजी आवास में करवाती हैं।
इस बारे में जब ग्राम प्रधान तुलसा यादव के पति जयकरन यादव से पूछा गया, तो उनका कहना था, “ग्राम प्रधान गांव का मुखिया होता, वह जहां चाहेगा, वहां बैठक कर सकता है और कार्यो का संपादन भी।”
जब ग्राम सचिवालय में भूसा और कंडे भरवाए जाने पर सवाल किया गया, तो उनका बड़ा अजीब जवाब रहा। उन्होंने कहा, “जब खाली पड़ा है तो कुछ भी भरा जा सकता है।”
यह मामला जब बांदा के मुख्य विकास अधिकारी आर.के. सिंह के संज्ञान में लाया गया, तो उन्होंने कहा कि ग्राम सचिवालय में भूसा और कंडे भरे जाने और किसी अधिकारी के हाजिर न रहने के मामले में बिसंडा खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) से जांच कराकर दोषी जनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।
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