प्रो. खान ने आईपीएन को भेजे अपने लिखित बयान में कहा है, “केंद्र सरकार के अंतर्गत बढ़ती हुई सांप्रदायिकता और मंत्रियों एवं सरकार के जिम्मेदारों की ओर से आए बयानों से दुखी होकर सर्टीफिकेट ऑफ ऑनर जो प्रेसीडेंट अवार्ड कहलाता है, उसे वापस करने की घोषणा कर रहा हूं। साथ ही इस पुरस्कार के साथ मिलने वाली धनराशि जो प्रत्येक वर्ष 50 हजार रुपये आती है, उसे भी वापस करता हूं।”
उन्होंने यह भी कहा है कि इस सूचना को वह अपने हस्ताक्षर द्वारा भारत के राष्ट्रपति तक पहुंचाना चाहता हैं।
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