बताया जा रहा है कि कुछ दिनों पहले भी खीरी के पिपरिया और परसपुर के पास खेत मंे बाघ की आहट मिली थी। ग्रामीणों ने बताया कि रात के समय उसके दहाड़ने की आवाज भी सुनाई पड़ती है। बाघ की दहशत से ग्रामीण रात भर आग जलाकर पशुआंे और खुद की रखवाली करते हैं।
ग्रामीणांे ने बताया कि सर्दियां शुरू होते ही हर साल बाघ जंगलों से खेतों की ओर निकल पड़ता है। इसके बाद कुछ दिन बाद खुद ही वापस जंगल मंे चला जाता है। हालांकि बाघ द्वारा किसी भी प्रकार के नुकसान की खबर अभी तक नहीं आई है लेकिन बाघ ने अपनी चहलकदमी से लोगांे में दहशत का माहौल बना दिया है।
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