मथुरा के होली गेट पर 15 मई को बदमाशों ने सर्राफा व्यापारियों पर गोलीबारी करते हुए लाखों का माल लूट लिया था। इस वारदात में दो सर्राफा व्यापारियों की हत्या की गई थी। वहीं दो घायल हो गए थे। इस मामले में पांच दिन बाद पुलिस ने छह बदमाशों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पूछताछ में रूपेश और सौरभ का नाम सामने आया था। पुलिस उनकी तालाशी कर रही थी।
इस मामले में नाम आने के बाद अरोपी रूपेश यादव बोदला क्षेत्र स्थित आवास विकास कॉलोनी सेक्टर एक में अपनी मौसी बीना के घर रहने चला गया। बताते हैं कि गुरुवार को उसने अपने पिता भगवान सिंह को मथुरा से बुलाया और पुलिस के सामने आत्मसमर्पण की इच्छा जताई।
भगवान सिंह ने बताया, “मैं वकील से सलाह लेने गया था। इसी बीच रूपेश ने बोदला की आवास विकास कॉलोनी में रहने वाली अपनी मौसी बीना के घर में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली।”
सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने मामला संदिग्ध देख पिता से पूछताछ की, तब उन्होंने सारी स्थिति साफ कर दी।
उन्होंने पुलिस को बताया, “रूपेश का नाम मथुरा में ज्वेलरी शोरूम में हुई डकैती में सामने आया था। वह सरेंडर करना चाहता था। लेकिन उसने आत्महत्या कर ली। मथुरा पुलिस ने रूपेश की मौसी के घर और मथुरा के शास्त्रीनगर स्थित उसके घर की तलाशी ली, लेकिन लूट का माल बरामद नहीं हुआ।”
मथुरा के एसएसपी विनोद कुमार मिश्रा ने बताया कि शनिवार की दोपहर में भगवान सिंह को छोड़ दिया गया। रूपेश का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। पुलिस अब सौरभ की तलाश में जुटी है।
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